भारत ; धारा बदलाव की…

Wave of Change in Indian politics

Wave of Change in Indian politics

Pic : www.Vimeo.com

दिल्ली  में २८ दिसम्बर को आखिर ‘आप’ की ताजपोशी हो ही गयी, लेकिन इसके साथ ही शुरू हो गया भारतीय राजनीती का एक नया अध्याय। भारत में इससे पहले ऐसा जोश जनता के बीच सिर्फ जे .पी  आंदोलन के समय हुआ था लेकिन तब और अब के भारत में काफी अंतर आ चूका है. उस वक़्त इमर्जेंसी ने लोगो के मन में आक्रोश जगाया था पर इस बार मुद्दे एक न होकर बहुत सारे हैं, इस बार मुद्दा है भ्रष्टाचार का, मुद्दा है मंहगाई का, मुद्दा है सुरक्षा का. हलाकि दिल्ली में इन मुद्दों के अलावा बिजली और पानी का मुद्दा भी शामिल है पर भारतीय परिप्रेक्ष में भ्रष्टाचार और मंहगाई ही प्रमुख मुद्दे है.

आज़ादी के बाद हर भारतीय ने सॊचा था कि अब तो हमारा अपना राज है, अब तो हम गुलाम नहीं हैं, अब हमारे देश में खुशहाली जरुर आयेगी, इंसानियत आएगी, हर नागरिक को सम्मान मिलेगा, सुरक्षा मिलेगी। लेकिन हुआ इसके ठीक उलट, बेरोजगारी और मंहगाई ने लोगों कि कमर ही तोड़ दी, यहाँ तक कि कुछ लोगों ने ये तक कहना शुरू कर दिया कि, इससे तो अच्छा था कि हम गुलाम ही रहते। धीरे धीरे भारतियों कि जिंदगी किसी तरह पटरी पर रेंगने लगी, टूटे हुए सपनो के साथ रहना हमने धीरे धीरे सीख लिया। हालांकि तब से अब तक काफी तरक्की भी हुई पर उसमे अधिकतम श्रेया भारत कि जनता को जाता है, उसकी मेहनत को जाता है. पिछले १५-२० सालों में राजनीति ने ऐसी करवट बदली कि चारो और भ्रष्टाचार, अपराध और बाहुबल कि बाढ़ सी आ गयी. भारतीय आम नागरिक और ज्यादा अपने खोलों में सिमटने लगा, डरने लगा अपने ही देश में सुरक्षा के ठेकेदारों से, तथाकथित बाहुबली समाजसेवकों से, अपराधी राजनेताओं से. भारतवासिओं ने इससे पहले राजनीती के अपराधीकरण और अपराध के राजनीतिकरण का ऐसा स्वरुप कभी नहीं देखा था. और जब ये गठजोड़ एक कदम और आगे निकलकर अपराधियों, नेताओं, नौकरशाहों और उद्योगपतिओं का महासंगठन बन गया तो भारतीय जनता त्राहि-त्राहि कर उठी, एक लावा हर किसी के दिलों में खौलने लगा. येही लावा आज एक धधकता हुआ ज्वालामुखी बन चूका है, आज हर भारतीय के सब्र का बाँध टूट चूका हैं जिसकी विस्फोटक परिणिति ‘आप’ के उदय के रूप में सामने आयी. लोगों ने न सिर्फ विशाल कांग्रेस को नाकारा बल्कि भाजपा को भी नकारने की चेतावनी दे डाली।

आज लोगों ने साबित कर दिया कि अब और बेवक़ूफ़ बने रहने को हम तैयार नहीं है, अब ये अन्याय और नहीं सहन किया जा सकता, अब और भाई भतीजावाद हमे मंजूर नहीं, ऐसी भ्रष्ट अफसरसाही हमे स्वीकार नहीं। दोस्तों, ये कोई छोटा मोटा परिवर्तन नहीं है, इस परिवर्तन में भारत कि खुशहाली भी छुपी हुई है. देश का ये परिवर्तित जनमानस उठ खड़ा हुआ है सीना तान कर राजनीती के ठेकेदारों के सामने कि, या तो सुधर जाओ वर्ना तुम्हारी भ्रष्ट और अपराधी राजनीती को हम हमेशा के लिए ध्वस्त कर देंगे, हम भारत के मजदूर, हम भारत के किसान, हम भारत के बुद्धिजीवी, हम भारत के पढ़े लिखे लोग, हम भारत के दबे-कुचले लोग, हम भारत के गरीब लोग, हम भारत के स्वाभिमानी लोग, “हम भारत के लोग”.

जय हिन्द,

इस्माइल।।

लेखक के विचार निजी है

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About ishmile khan

A Pen is always mightier then a Sword; that's what Ismail believes. He operates many blogs, social sites pages and writes for social issues & causes. Active member of PETA, AHRC, Greenpeace, Save arctic, world peace organizations and similar fields.

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