विजय जॉली के “शांतिपूर्ण” प्रदर्शन पर बवाल और उस बवाल पर कई सारे सवाल

Vijay Jolly protests at Shoma's homeविजय जॉली दिल्ली में बीजेपी का एक जाना पहचाना चेहरा है. कई बार राष्ट्रीय मुद्दों पर टीवी बहस के दौरान भी हमने उन्हें देखा है. 2008 के दिल्ली विधान सभा चुनाव में उन्होंने शीला दीक्षित के खिलाफ लड़ने की हिम्मत दिखाई थी और फिलहाल वे बीजेपी फाँरेन सेल के कन्वेनर है और त्रिपुरा राज्य में बीजेपी के प्रभारी है.

कल से वो चर्चा में इसलिए है क्यों की उन्होंने एक अजीबोगरीब प्रदर्शन किया. दिल्ली में तहलका की पूर्व कार्यकारी संपादक शोमा चौधरी के घर पर उन्होंने एक “शांतिपूर्ण” प्रदर्शन कर ऐसा उत्पात मचाया की खुद बीजेपी ने ये कह दिया की ये “शांतिपूर्ण” प्रदर्शन विजय जॉली का व्यकिगत प्रदर्शन था और पार्टी का उससे कोई लेना देना नहीं है. विजय जॉली ने शोमा चौधरी के घर के आगे लगी नेम प्लेट पर काली स्याही से “आरोपी” लिख दिया और गेट के सामने स्याही गिरा कर प्रदर्शन किया. विजय जॉली यहीं नहीं रुके, जब शोमा अपने घर से निकल कर अपनी गाडी में बाहर जा रही थी, तो जॉली उनकी कार पर भी चढ़ने की कोशिश करते नज़र आ रहे थे. इस हरकत के बाद ये समझने में दिक्कत हो रही है की ये प्रदर्शन शांतिपूर्ण कैसे था?

पार्टी की वरिष्ठ नेता और लोकसभा ने विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने मीडिया से कहा की विजय जॉली ने उन्हें और अरुण जेटली को इस प्रदर्शन की सुचना दी थी जिस पर दोनों ने विजय जॉली को प्रदर्शन करने से मना किया था. अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेताओ की बात को नज़रअंदाज़ कर उन्होंने बीजेपी के झंडे साथ में रख कर जमकर उत्पात मचाया और कहा की वो यह प्रदर्शन नारी अस्मिता की रक्षा के लिए कर रहे है. अब एक नारी का अपमान कर वो दूसरी नारियो की अस्मिता की लड़ाई कैसे लड़ सकते है, इस बात का उत्तर उनके पास भी नहीं था. ये बात और है की जिस नारी के खिलाफ जॉली प्रदर्शन कर रहे थे, उस पर बहुत बड़ा आरोप लगा है, लेकिन खुद न्यायाधीश बन कर किसी महिला के घर के आगे आरोपी लिख देना, अशोभनीय बात है.

अब विजय जॉली ने ये सब क्यों किया, नेताओ के मना करने के बावजूद इस प्रदर्शन को उन्होंने क्यों अंजाम दिया, इन सवालों के जवाब शायद ये हो सकता है की विजय जॉली टीवी और मीडिया के ज्यादा कैमरो को देख कर उत्साहित हो गए और अति उत्साह के कारण उन्होंने ये सब किया. एक जवाब ये भी हो सकता है की वो मीडिया में जम कर उचल रहे मामले से थोड़ी बहुत लोक्प्रियात्ता हासिल करना चाहते है. लेकिन बड़ा सवाल बीजेपी के नेताओ से है, क्या इस उत्पात से बीजेपी अपना पल्ला ये कह कर झाड़ सकती है की ये जॉली का व्यक्तिगत प्रदर्शन था, जब की पार्टी के झंडे और पार्टी कार्यकर्ता वहां पर साफ़ साफ़ नज़र आ रहे थे. अगर बीजेपी के नेता इस प्रदर्शन को असभ्य मानते है तो क्या विजय जॉली और उनके समर्थक कार्यकर्ताओ की सदस्यता बर्खास्त की जायेगी? बड़े नेताओ की बात न मान कर प्रदर्शन करना जिसमे अभद्रता और अशोभनियता हो, इस पर बीजेपी का क्या रुख होगा?

मामले को बीत कर 24 घंटो से ज्यादा समय हो गया है और बीजेपी ने इस मामले में कोई कार्यवाही नहीं की, शायद इसी वजह से बीजेपी की विरोधी पार्टिया इस प्रदर्शन को बीजेपी की संस्कृति बता रहे है. बीजेपी के बड़े नेताओ की अवहेलना कर ऐसे अभद्र प्रदर्शन पर बीजेपी क्या कार्यवही करती और कब करती है, इस पर सब की नज़र है. लेकिन एक मजेदार बात ये भी रही की दिल्ली पुलिस इस सारी घटना को एक मूक दर्शक बन कर देख रही थी. ये वही दिल्ली पुलिस है जिसने दामिनी कांड के दौरान मिहिला अस्मिता की लड़ाई लड़ रहे लाखो युवाओ पर लाठी और आंसू गैस चलायी थी. पुरे प्रदर्शन को दिल्ली पुलिस के अधिकारी ऐसे देख रहे थे जैसे वहां सब काम कानून के अनुसार ही हो रहा था. क्योकि दिल्ली पुलिस केंद्र सरकार के अंतर्गत आती है तो सवाल कांग्रेस पर भी उठेंगे. और पहला सवाल खुद पार्टी के नेता दिग्विजय सिंह ने उठा उठा दिया.

digvijay singh tweet on Vijay Jolly

इस ट्वीट के दौरान दिग्विजय सिंह शायद ये भूल गए की दिल्ली पुलिस उन्ही की पार्टी द्वारा शासित सरकार के अंतर्गत आती है. बहरहाल इस मामले का भी वही होगा जो अन्य मामलो का होता है. कुछ दिन बीत जाने के बाद लोग इस घटना को भी भूल जायेंगे. लेकिन ये राजनैतिक नौटंकी, महिला अस्मिता की लड़ाई में महिलाओ का अपमान और पुलिस का प्रदर्शन के दौरान व्यवहार, हम सब को एक सवाल से रूबरू करता है. वो सवाल है “आखिर ये सब कब तक चलेगा?”

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About Yogesh Mandhani

Businessman by Profession, Journalist by Passion. Began Social life with Janlokpal Agitation led by Anna Hazare, now working for a media which will work without any fear or favour. Report all the news and views which affects common man of this nation. Also if any hard evidence is available, I would like to write on any issue which is concealed by Mainstream Media for reasons what so ever. It gives immense satisfaction and pleasure working at Awaz Aap Ki.

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