टी वी विज्ञापन का गिरता स्तर

advt 2आप टी वी खोल कर देखिए . टी वी का पत्रकार (एंकर) लोकत्रंत का रक्षक बन कर सामने खड़ा होगा .जो नैतिकता और इमानदारी का पुतला होगा .वह हर किसी से सवाल करेगा . उसे शर्मिंदा करेगा .कहेगा देश जानना चाहता है .आप जवाब दो . जवाब दो .अगर आपको उससे कोई सवाल पूछना हो या शिकायत करनी हो तो टी वी ब्रोडकास्टर एशोसिएशन को पत्र लिखें .जिस का पता नीचे पट्टी पर कभी कभी दिखलाया जाता है . अब उससे सवाल कौन पूछे ?

हम सब जानते हैं कि देश के कानून के अनुसार शराब सिगरेट के विज्ञापन टी वी नहीं दिखाए जा सकते .अब टी वी पर एक विज्ञापन आता है जिसमें एक रेस्टोरेंट में अजय देवगन एक लड़की को छेड़ने वाले गुंडे से मारपीट करता है .बाद में सब के लिए ए सी पी का ऑडर करता है .फिर एक सवाल आता है .ए सी पी याने .उसका अजय देवगन जवाब देता है “सब के लिए ए सी पी मयुझिक सी डी “ मूर्ख से मूर्ख आदमी को समझ आता है कि यह ऐक्रिस्टोकरेट प्रीमियम विस्की का विज्ञापन है .

टी वी पर नैतिकता , कानून के पालन की बात करने वाले एंकर , उसके संपादक और टी वी के मालिक को यह मुयझिक सी डी का ही विज्ञापन लगता होगा .ऐसा हम मान लेते हैं .

इसी प्रकार एक विज्ञापन बॉडी वार्मर ( गर्म कपडों ) का आता है .जिसमें एक सगाई का दृश्य है .नायक नायिका की उंगली में अंगूठी पहनाने की कोशिश करता है .जिसमें उसका हाथ बार बार फिसलता जाता है .एक सवाल पीछे से आता है, लगता है इसके पास नहीं है .शराब का गिलास हाथ में लिए मेज पर बैठा आदमी विश्वास से उस देख कर कहता है, लगता है इसके पास नहीं हैं . इसके बाद ,एक लड़की शरारत भरे अंदाज में कहती हैं , लगता है जीजू के पास नहीं है . इस पर नायक खीज कर पूछता है , क्या नहीं है मेरे पास ? तब एक छोटी लड़की बॉडी वार्मर कपड़ों का सेट लेकर आती है जो कहती है ……..के वार्मर .

यह विज्ञापन बॉडी वार्मर कपड़ों का ही है . किन्तु जिस तरह से कहा और दिखलाया गया है वह पुरानी मुकरी शैली है ..क्या सखी चोर न सखी सैयां .किन्तु इस विज्ञापन में जो इंगित है वह यहाँ लिखा भी नहीं जा सकता .सभी उसे समझते हैं लेकिन टी वी पर आने वाले एंकर उनके विद्वान संपादक जो भाषा के विद्वान हैं , जो मन की बात जान लेते हैं .उन्हें कुछ समझ नहीं आता .

 

देश के कानून के अनुसार टी वी पर दवाइयों के विज्ञापन नहीं दिखलाये जा सकते .पहले चवनप्राश , आयोडेक्स जैसे दर्द निवारकों के विज्ञापन आते थे .जिन के लिए डाक्टर की पर्ची की जरुरत नहीं होती थी .अब न्योरोबिन फोर्टें गोलियों का सीधे सीधे विज्ञापन आता है .क्या टी वी के संपादक और संचालक को यह नहीं पता कि इस दवा का इस प्रकार विज्ञापन प्रसारित करना अनुचित है .यह चिकित्सा विज्ञान की आचार संहिता और कानून का उलंघन है . किन्तु टी वी वाला तो देश और लोकतंत्र का रक्षक है .उस से सवाल कौन करे ?

गर्भ निरोधकों के विज्ञापन पहले संतति निरोध के लिए आते थे .अब वे आनंद के लिए एक वस्तु के रूप में आ रहे हैं जिसे एक ब्रांड के रूप में स्थापित किया जा रहा हैं इसलिए उस का बार बार विज्ञापन आ रहा है . चेनल में आते नोटों के सामने टी वी के संपादक और मालिक को उन नोटों के अलवा कुछ नहीं दिखता है .

इस मामले में टी वी के एंकर या संपादक कुछ कर पाएंगे. ऐसी उम्मीद नहीं रखनी चाहिए .टी वी एंकर अभिनेता है और संपादक टी वी के संचालक का नौकर .मालिक जो चाहेगा संपादक वही दिखलाएगा या नौकरी छोड़ कर अलग खड़ा हो जाएगा .इसके अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं है .

ब्रोडकास्टर एसोसिएशन , कोई और काउंसिल या कोई परिषद इस मामले में कुछ कर पायेगी ऐसी उम्मीद भी आपको नहीं रखनी चाहिए .सरकार की किसी एजेंसी अपनी ओर से कुछ करेगी , अगर उसे कुछ करना होता तो वह अब तक कर चुकी होती .

यह मुक्त बाजार की व्यवस्था है .यहाँ सब बाजार ही तय करेगा .अब बाजार सरकार भी बना रहा है तो अच्छा यह रहेगा कि सरकार इस क्षेत्र को भी नियम कानून से मुक्त कर दे जिस से एक दर्शक का इस तरह से तो दिल नहीं दुखेगा .

अशोक उपाध्याय

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