दिल्ली कि सच्ची कहानी

“दिल्ली कि सच्ची कहानी “
सभी NRI और देश के युवाओं को समर्पित .

सुनो दिल्ली कि सच्ची कहानी ,
मैं हूँ दूर अपने वतन से, पर तुमको है सुनानी ,
दिल्ली कि जनता मांग रही है कबसे बिजली-पानी ,
बहन संतोष ,दामनी और गुड़िया के मुज़रिम को है फांसी दिलानी ,
लेकिन ये शीला और हर्षवर्धन है जो बात ना मानी ,
वर्षों बाद मौका है आया, फिर ना दुबारा है इसको आनी,
माँ दे रही दुवाएँ , दे रहे आशीष नाना -नानी ,
यही अब देश-विदेश के हर युवाओं कि है ज़ुबानी ,
कमल-हाँथ को मार झाड़ू से है देश भगानी ,
अबकी आम आदमी को है दिल्ली में लानी .
दिल्ली कि अब यही कहानी ॥

रचना : हेमन्त कुमार – 25-11-2013

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