कांग्रेस और बीजेपी जनित लगता है अनुरंजन का “आप” पर स्टिंग ?

anuranjanमित्रो, कांग्रेस और बीजेपी की जब से एक हुई है, इनका साथ एक के बाद एक दैत्य को जन्म दे रहा है | कभी कांग्रेस  सुखराम, कलमाड़ी और शीला जैसे नेता तैयार करती है, तो कभी बीजेपी के गडकरी जैसे | कभी- कभी तो ये दोनों मिल कर दूसरी पार्टियों जैसे डी. एम. के,  जे.एम्, एम्, और राष्ट्रीय जनता पार्टी जैसे दूसरी प्रजाति के लोगों के साथ मिलकर, शीबू, लालू, मधु कोड़ा, राजा आदि जैसे भ्रष्ट लोगों को जन्म देते हैं। कई दशकों से यह चलन चलता  रहा है, जिसका पोषण बड़े व्यापारिक घराने बहुत बढ़िया तरीके से करते आ रहे है।मीडिया भी इनका साथ अच्छी तरह निभा रहा है | देश की राजनीति में इन बरसाती कीड़ों की संख्या इतनी बढ़ गई कि आम आदमी का हाल उस फासल से भी ज्यादा बुरा हाल था, जो बरसाती कीड़ो का शिकार होती है।  बरसात की अवधि  भी ६५ साल से ऊपर निकल गई, कई बार जयप्रकाश जैसे कीट नाशक आये परन्तु ये दैत्य कीट उन्हें भी हजम कर डकार तक नहीं मारी।

दो साल पहले अन्ना हज़ारे और उनके साथियों ने कांग्रेस – बीजेपी के इस साथ को जनता के सामने रख दिया | जब आंदोलन का नतीज़ा कुछ नही निकाला तो उसके बाद अरविन्द ने अन्ना से अलग हो कर देश के युवाओं के साथ मिलकर अपना शक्ति संग्रह किया।  देश के सभी उपेक्षित नागरिक जो इन टिड्डी दलों के लम्बे मौसम से त्राहि- त्राहि कर रहे थे, अपने खून का एक- एक कतरा दान कर “अरविन्द” के साथ हो लिए। पहले तो कोंग्रेस- बीजेपी ने अपने मद में चूर होने के कारन “आप” की शक्ति को नजर अंदाज़ किया, परन्तु जब इनके कुर्सी के पावं डगमगाने लगे तब दोनो ने आप की शक्ति को नष्ट करने की सोची। कई तरह से अस्त्र -शस्त्र जैसे विदेशी फंडिंग, सम्प्रदायवाद, खुपिया जांच आदि चलाये परन्तु वज्र का तेज तो कम नहीं हो सकता था वो और बढ़ता गया, क्योंकि वो तो आम आदमी के खून- पसीने से बना था।

अब इस अति आपात काल की स्थिति में कांग्रेस-बीजेपी के समक्ष कोई दुर्दांत दैत्य पैदा करने के अलावा कोई चारा नहीं था, इन्होने “निचकेता” को पैदा किया, परन्तु वो भी प्रभाव  विहीन हो गया।  अब तक “आप” के तेज से उठे बबंडर से इनकी कुर्सी गिरने लगी.  इनसे कुछ नहीं सूझा और ” अनुरंजन झा” को गर्भ में धारण ही किया था कि “आप” रुपी वज्र इनकी कोख में जा लगा, और गर्भपात हो गया, वह अपूर्ण दैत्य शिशु “अनुरंजन” अपनी माया फैला कर वज्र का तेज नष्ट  करने कि कोशिश तो बहुत की, परन्तु अपूर्ण गर्भ, वो भी अधर्म का, धर्मं के तेज को कैसे नष्ट कर सकता था । उसका भी वही हाल हुआ जो अधर्मियों का होता है, अभी वेंटिलेटर में हैं परन्तु जैसे ही मानहानि के मुक़दमे का फैसला आएगा बिचारा “नरकवासी” हो जायेगा।  और अब कॉंग्रेस – बीजेपी का गर्भ भी क्षत -विक्षत हो गया है, इसलिए नया दैत्य जन्मदेना  भी असम्भव है।  बेचारे दैत्य दम्पति …….

जब तक इस “चपला” से साथ आम आदमी का खून- पसीना जुड़ा हुआ है, इसे दैत्य नाशक “वज्र” पद से कोई हटा नहीं सकता। वन्देमातरम

– Dr. Sudheer Kumar Shukla (The author is an independent blogger. Awaz Aapki may or may not be responsible for his views.)

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About Pushpendra P. Singh

A common man (आम आदमी) who is an Experimental Nuclear Physicist by choice, and an Activist by nature.

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