स्टिंग ऑपरेशन: लोकतंत्र को भ्रमतंत्र बनाने की साज़िश?

Sting Operation against AAP

Sting Operation against AAP; Real or a attempt to spread Phantom:

चुनावो को एक प्रजातान्त्रिक देश में लोकतंत्र का महोत्सव माना जाता है, लेकिन आज की राजनैतिक हालात में हमारा लोकतंत्र “लोकतंत्र” कम और “भ्रमतंत्र” ज्यादा नज़र आता है. स्टिंग ऑपरेशन सच्चा है या झूठा, इसकी जांच के लिए समय लगता है, लेकिन इसी सच्चे/झूटे स्टिंग ऑपरेशन के माध्यम से विरोधी पार्टिया भ्रम फैलाती है. ऐसे झूठे /सच्चे स्टिंग ऑपरेशन का चुनावो के बाद क्या होता है, हम सभी जानते है.

इस देश में चुनावो से पहले बहुत बार स्टिंग ऑपरेशन किये गए, लेकिन आज तक एक भी स्टिंग ऑपरेशन का क़ानूनी रूप से कोई निराकरण नहीं हुआ. स्टिंग झूठा हो तो पत्रकार को सजा मिलनी चाहिए और यदि सच्चा हो तो पकडे गए नेता पर क़ानूनी कार्यवाही होनी चाहिए. लेकिन आज तक कोई ठोस क़ानूनी कार्यवाही किसी भी स्टिंग ऑपरेशन के बाद नहीं हुई. जिन लोगो को हमने 12 साल पहले टीवी पर पैसा लेते हुए देखा, आज वो लोग ज़मानत पर बाहर आज़ाद घूम रहे है और प्रधानमंत्री पद के दावेदारों के साथ मंच साझा करते नज़र आ रहे है. इतना ही नहीं, 2008 के विश्वास मत के दौरान हुए स्कैंडल जिसमे संसद में 3 करोड़ रुपियो के बंडल उछाले गए थे, उस स्टिंग का अभी तक कुछ नहीं हुआ और तमाम बड़े नेता हाल ही में बरी हो गए.

चुनावो से ऐन 10 दिन पहले स्टिंग ऑपरेशन का मीडिया में आना, अपने आप में बहुत बड़ी संदेहास्पद बात है। 10 दिन में जांच तो होगी नहीं लेकिन भ्रम जरुर फ़ैल जायेगा और चुनाव के बाद स्टिंग झूठा साबित हो जाये तब भी वो उतना नुकसान कर देगा जिस नुकसान के लिए उसकी रचना की गयी है। आज आम आदमी पार्टी के नेताओ ने 14 घंटो के उस स्टिंग ऑपरेशन की जांच की और उसमे कुछ ऐसे हिस्से पाये जिसे मीडिया सरकार ने जान बुझ कर हटा दिया. विडियो और ऑडियो की ऐसी कलाकारी इस स्टिंग ऑपरेशन में दिखी की पहली नज़र में समझदार से समझदार आदमी इस पर भरोसा कर ले. ये षड़यंत्र किसने रचा, क्यों रचा और क्या इस षड़यंत्र के लिए कोई अनैतिक धन का लेन देन हुआ है, इन सब बातो की जांच सालो साल चलती रहेगी. लेकिन 10 दिन में जो राजनैतिक माहौल एक पार्टी से दूसरी पार्टी की तरफ बदलता है, उसे चुनावो के बाद कोई नहीं उलट सकता. एक बार चुनाव हो गए और उस झूठे स्टिंग ऑपरेशन की वजह से कोई पार्टी चुनाव हार गयी तो इस देश में ऐसा कोई कानून नहीं है जो जनादेश (वो जनादेश जो 10 दिन में स्टिंग ऑपरेशन की वजह से बदल गया) वाली सरकार को निष्कासित कर उस पार्टी के हाथ सत्ता सौंप सके जिसके खिलाफ चुनाव से 10 दिन पहले झूठा स्टिंग ऑपरेशन किया गया. शायद दिल्ली में इसी भ्रम का फायदा उठाने का प्रयास बीजेपी और कांग्रेस करना चाहते है.

आम आदमी पार्टी के 71 घोषणा पत्र सार्वजनिक हुए, कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बड़ी बारीकी से उस घोषणा पत्र में समाधान सुझाये गए है। व्यवस्था परिवर्तन की दृष्टि से भी यह घोषणा पत्र बहुत महत्वपूर्ण है। भ्रष्टाचार विरोधी जनलोकपाल बिल और सत्ता के विकेंद्रीकरण के उद्देश्य से स्वराज का कानून बहुत बड़ी घोषणा है। मै ये नहीं कहता की AAP का घोषणा पत्र शत प्रतिशत सही है, किन्तु उसकी अच्छाई और बुराई पर चर्चा तो होनी चाहिए। लेकिन आज सारी चर्चा स्टिंग ऑपरेशन पर केन्द्रित हो गयी है। आज से एक महिना पहले तक लग रहा था की दिल्ली का चुनावी मुद्दे भ्रष्टाचार,बिजली, पानी आदि होंगे लेकन आज के परिदृश में दिल्ली का चुनावी मुद्दा ये है की “AAP के खिलाफ स्टिंग ऑपरेशन हुआ है और उससे AAP की ईमानदारी पर सवाल खड़े हुए है”.

AAP ये गारंटी नहीं दे सकती की उसमे जुड़े सभी लोग अच्छे होंगे, लेकिन AAP एक ऐसी व्यवस्था की गारंटी जरुर दे सकती है जिसमे बेईमानी करने का कोई अवसर ही न मिले। शायद इसीलिए  देश भर के लोगो को लगता है की AAP को एक मौका मिलना चाहिए.

लेखक के विचार निजी है, आवाज़ आपकी उनके विचारो का समर्थन करने हेतु बाध्य नहीं है.

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About Yogesh Mandhani

Businessman by Profession, Journalist by Passion. Began Social life with Janlokpal Agitation led by Anna Hazare, now working for a media which will work without any fear or favour. Report all the news and views which affects common man of this nation. Also if any hard evidence is available, I would like to write on any issue which is concealed by Mainstream Media for reasons what so ever. It gives immense satisfaction and pleasure working at Awaz Aap Ki.

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