मुंबई – भागते शहर की घुटनों पर रेंगती सुरक्षा

mumbai attack

26 नवम्बर 2013 आया और मुंबई हमले को एक बार फिर याद किया गया नम आंखो के साथ। जगह जगह सभाए हुई, शहीदों को श्रद्धांजलियां दी गई, उनको न भुलाने के नारे लगाए गए, एनएसजी की बहादुरी को याद किया गया, यानी कुल मिलाकर वह सब हुआ जो किसी भी ज़िंदा देश को अपनी संप्रभुता पर हुए हमले की याद में करना चाहिए। लेकिन जो सवाल 26/11के दिन आतंरिक सुरक्षा को लेकर उठे थे उनका कोई जवाब ढूँढने की कोई ईमानदार कोशिश अब तक नहीं की गई।

ज़रा गौर करें। 13 जुलाई 2011 झवेरी बाजार, ओपेरा हाउस और दादर में धमाके हुए जिसमे 26 लोग मारे गए 130 घायल हुए। धमाकों के बाद कहा गया कि इनकी पूर्व सूचना दे दी गई थी लेकिन ख़ुफ़िया विभाग और स्थानीय पुलिस में तालमेल न होने के कारण कोई कार्रवाई नहीं हो पाई। यानी सुरक्षा एजेंसियों में तालमेल के अभाव का जो आरोप मुंबई हमलों के वक्त खडा हुआ था अब भी वहीँ है और पहले से ज्यादा बड़ा है क्योंकि इतने बड़े बड़े वादे और दावे इस से पहले कभी सुरक्षा को लेकर नहीं हुए थे।

मुंबई हमले के बाद राम प्रधान कमेटी का गठन सरकार द्वारा किया गया था लेकिन आज भी सुरक्षा को लेकर इस समिति द्वारा दी गई अधिकतर सिफारिशें सरकारी फाइलों में दबी पड़ी हैं। मुख्यमंत्री प्रथ्वीराज चव्हाण ने इस बात को स्वयं माना कि सुरक्षा को लेकर जो कदम उठाये जाने थे नहीं उठाये गए।

कुछ उदाहरण पेश हैं जो यह बताने के लिए काफी हैं कि कितना काम अब तक देश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले इस शहर की सुरक्षा को लेकर हो चुका है। केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र में 12 समुद्री पुलिस स्टेशन बनाने की बात की थी लेकिन अभी तक केवल तीन पर काम हो पाया है जिनमे से केवल दो काम करते हैं। पचास से ज्यादा स्पीड बोट डीजल की कमी से चलते नहीं। बुलेटप्रूफ जैकेट और जीपीएस ट्रेकिंग उपकरण अब तक पुलिस बल को उपलब्ध नहीं कराये गए हैं। समुद्र किनारे पर अवैध कब्ज़ा, बिना लाइसेंस के चलती बोट्स पुलिस बल के लिए समुद्र निगरानी में बड़ी बाधा हैं। हैरान करने वाली बात यह भी है कि समुद्री सुरक्षा में तैनात 150 सिपाही तैरना नहीं जानते। समुद्र में गश्त बढ़ाना, 57 हजार पुलिस बल नियुक्त करना, सीसीटीवी कैमरे लगाना इत्यादि काम भी अभी लालफीताशाही में फंसे हुए हैं। ख़ुफ़िया विभाग के बीच तालमेल के नाम पर केंद्र और राज्य सरकारों में बीच खींचतान से मामला आगे नहीं बढ़ पा रहा है। आतंकी गतिविधियों को रोकने के लिए गठित एटीएस को अभी भी 250 अफसरों के आने का इन्तजार है। वादा यह भी था कि एनएसजी कमांडो की तर्ज पर मुंबई का अपना फ़ोर्स वन होगा, इसकी स्थापना 19 नवम्बर 2009 को हुई जिसके लिए 350 जवानों का चयन महाराष्ट्र पुलिस के जवानों में से किया गया लेकिन यह बल नियमित अभ्यास के लिए अभी तक तरस रहा है।

वहीँ बात दोषियों को मिली सजा की करें तो जहाँ एक ओर कसाब जैसी छोटी मछलियाँ अपने किये की सजा पा चुकी हैं वहीं हमले का मास्टर माइंड अभी भी पाकिस्तान में खुला घूम रहा है और भारत के खिलाफ हमले का आह्वान लगातार कर रहा है।

शायद इस देश को अभी यह बात समझने के लिए अभी कुछ और हमलों की जरूरत पड़े कि हमले रोज नहीं होते लेकिन बचाव की तैयारियां रोज करनी पड़ती हैं।

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About Satish Sharma

Satish Sharma is Editor, Hindi of Awaz Aapki. Writes in many News Papers & Magazines as Columnar, Analyst. Like to work as Citizen Journalist. Doing his bit of work in raising voice of unheard. Currently he is managing two shows of Awaz Live TV named Mashal and Manthan also.

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