धर्म का सेंसेक्स

d3अपना देश संविधान के अनुसार धर्मनिरपेक्ष देश है या कहिए देश की सरकार जो भी होगी वह धर्मनिरपेक्ष होगी .मगर लोग धार्मिक होंगे या वे धार्मिक होने के लिए स्वत्रंत होंगे और सरकार उनकी धार्मिकता की रक्षा करेगी .सरकार यह काम बिना विवाद में पड़े कैसे करेगी वही जाने.

दूसरी ओर लोग हैं जो देश के संविधान के अनुसार चलने की बजाय अपने धर्म के अनुसार चलने को प्राथमिकता देते हैं अगर कहीं धर्म और संविधान की धाराओं में विवाद या टकराव होता है तो उनका बल संविधान को धर्म के अनुसार बदलने पर बल होता है .और देश के महान नेता ,सत्ता में बने रहने के लिए हमेशा संविधान को दूसरे दर्जे पर रखते हैं उनका वास्ता तो ऐसे लोगों से ही पड़ता है और वे उन्हें ही प्राथमिकता देते हैं .संविधान में तो संशोधन होते रहते हैं .धार्मिक संहिताओं में संशोधन कौन करे .

हम सब जानते हैं कि हम जो आज हैं मुसलमान ,इसाई , सिख ,जैन ,बौद्ध या कुछ और ,वो पहले नहीं थे .हमारे पूर्वज अपने पुराने रूप को छोड़ कर नए धर्म में दीक्षित हुए थे .अब अधिकांश मामलों में धर्म का निर्धारण जन्म से होता है .बहुत कम लोग ,अपना धर्म बदल कर नए धर्म में दीक्षित होते हैं .दूसरी ओर धर्म व्यक्तिगत न होकर संस्थागत हो गया है जिसका लक्ष्य अपना विस्तार करना है .

दूसरी ओर ,देश के विवेकवान प्रबुद्ध लोग हैं जो कहते हैं .सभी धर्म समान हैं .हमें सभी का आदर करना चाहिए .सभी में एक ईश्वर है . ये लोग विभन्न धर्मो के बीच जो अंतर्विरोध है उस पर कभी चर्चा या विवाद नहीं करते .ये लोग कभी अपना जन्मजात धर्म छोड़ कर दूसरे धर्म में दीक्षित नहीं होते .

दूसरे धर्मों के प्रति इनकी श्रद्धा या समानता का भाव एक ढकोसला है .वास्तव में ,ये लोग अपने जन्मजात धर्म के बारे में गहनता से कुछ नहीं जानते हैं और ये लोग खुले मस्तिष्क से दूसरे धर्मो के बारे में कुछ जानेंगे और फिर धर्म के बारे में अपनी राय बनायेगें ऐसे उम्मीद भी इन से नहीं की जा सकती .अगर ऐसा होता तो आज देश में धर्म का रूप संस्थागत न होकर व्यक्तिक होता .

ऐसे समाज में कुछ ऐसी घटनाएँ हो जाती हैं जो कुछ सोचने पर मजबूर करती है .हाल ही में शूटर तारा शाहदेव का मामला ऐसा ही मामला है .जिसमें पत्नी ने अपने पति पर उसे इस्लाम कबूल करने ( धर्म परिवर्तन ) का आरोप लगाया है .पत्नी के अनुसार उसने ,अपने पति को हिंदू मान कर ,हिंदू परम्परा के अनुसार उससे शादी की है .और अब उसे पता चला है कि उसके पति का एक रूप मुसलमान का भी है वह नवाज भी पढता है और उसे मुसलमान बनाना चाहता है .

आगे की जांच और भी कुछ बतलाती है कि पति का नाम रणजीत सिंह कोहली है .पहले कहा गया कि वह हिंदू है ,फिर कहा गया कि वह सिख है . फिर कहा गया कि उसका नाम रफीबुल हसन है .फिर कहा गया कि वह मुसलमान नहीं है वह बस नवाज पढ़ता है .मुझे कुछ साल पहले आई फिल्म चाची ४२० याद आ रही है जिसमें नायक अपना स्त्री रूप छुपाने के लिए ,अमरीशपुरी ,परवेश रावल और केशटो मुकर्जी के सामने लगातार अपना धर्म और जाति बदलता रहता है .

अलीगढ़ अभी ७२ लोगों ने ईसाइयत छोड़ कर अपना पुराना धर्म अपना लिया है .इसे वे घर वापसी कह रहे हैं . मगर दूसरी ओर दोनों धर्मो के संस्थानों में बड़ी हलचल है .इसी हलचल से शहर में दंगे होते हैं .समाज का धुर्वीकरण कारण होता है और रेवड़ की तरह वोट बैंक में तब्दील हो जाता है .

जब प्रधानमंत्री अपने कहने पर देश में ,एक दिन में, बैंकों में एक करोड़ से अधिक खाते खुलवा सकते हैं .तो क्या देश में कोई ऐसा नेता नहीं है जो एक दिन में एक करोड़ लोगों का धर्म परिवर्तन करवा दे .ये लोग अपने धर्मातरण के फायदे ( आध्यात्मिक ,नैतिक या मौद्रिक ) लें .अपनी पसंद के लोगों से विवाह करें ,पसंद के कॅालिजों में पढ़ाई करें ,सम्पति अर्जित करें फिर चाहे तो अपने नए धर्म में रहें या पुनः फायदे के लिए फिर धर्मान्तरण कर लें .ऐसा वह महीनों या सालों में कई बार कर सकते हैं .कानून में ऐसी कोई रोक नहीं है .

मेरी कल्पना है कि यदि ऐसा हो होने लगे तो सरकार को इस धर्मान्तरण पर नजर रखनी होगी .उसी के अनुसार नीतियां बनानी होंगी .उससे कुछ कमाने के लिए के शेयर बाजार की तर्ज पर एक स्टाक एक्सचेंज खोला जा सकता है .आज साढ़े तीन बजे तक इतने ये से ये हो गए . फिर इस कारोबार को वायदा कारोबार तो बढाया जा सकता है .सरकार की इन नीतिओं से ये या हो गए या ये हो जायेगें .

आप मेरी कल्पना से गंभीर हो गए .आप को अगर ऐसा लगता है कि हमारे बीच एक ऐसा शेयर बाजार अप्रत्यक्ष रूप में मौजूद है तो ठीक ही लगता है .लेकिन सच में समूह में धर्म परिवर्तन होने लगेंगे तो इस धर्म और राजनीति बाजार के कारोबार में बार बार सर्किट लगेंगें और जल्द ही यह धराशाही हो जाएगा .

अशोक उपाध्याय

 

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