दिल्ली में बिजली का संकट: जोर का झटका

Power cut in delhi

बिजली इंसान कि उन चंद जरूरतों में से है जिनके बिना इंसान का जीवन दूभर हो जाता है।  ये हमारे देश कि विडंबना ही है कि आज़ादी के इतने सालों बाद भी हमे बिजली, पानी और दूध जैसी रोजमर्रा की चीजों के लिए भी रोज हलाकान होना पड़ता है। और सबसे अचरज की बात तो ये है कि, मै किसी गाँव या पिछड़े इलाकों की बात नहीं कर रहा हूँ बल्कि मैं तो भारत के महानगरों के बारे में बात कर रहा हूं, हर शहर में कमोबेश यही हालात हैं। आइये अब एक कदम और आगे बढ़ कर बात करते हैं देश की राजधानी दिल्ली की जहाँ दुनिया भर के राजनायकों का आना जाना लगा रहता है, किसी भी देश की राजधानी उस देश के गौरव का प्रतीक होती है जिसपर सारी दुनिया की नजरें टिकी होती हैं, अगर वहाँ पर ही लोगों को समुचित बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं हो पातीं तो बाकी शहरों की सुविधाओं के बारे में आसानी से अंदाजा  लगाया जा सकता है। ऊपर से जले में नमक छिड़कने का काम देश में फैली लालफीताशाही और निजी कम्पनियों का आपसी गठबंधन पूरा कर देता है, आजकल कुछ ऎसे ही हालात हैं राजधानी दिल्ली के।

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यह तो अब एक बहुचर्चित विषय हो चुका है कि,  दिल्ली में बिजली एवं पानी की क्या स्थिति है, पावर कट होना एक आम समस्या बन चुकी है। दिल्ली में बिजली के दाम आसमान छू रहे हैं, हाल ही में दिल्ली में नयी सरकार सत्ता में आयी है है। लेकिन दिल्ली में जनता की परेशानी कम होने में थोडा और वक़्त लगेगा, हालाँकि बिजली और पानी इस बार दिल्ली विधान सभा चुनावों में एक अहम् मुद्दा था। आम आदमी पार्टी पहले ही आरोप लगा चुकी है कि निजी विद्युत् कम्पनियों और दिल्ली की तत्कालीन शीला दीक्षित सरकार के बीच सांठगांठ है जिसके चलते विद्युत् वितरण कम्पनियां मीटरों में गड़बड़ी करके मनमाने दाम वसूल रहीं हैं,  लेकिन अगर ‘आप’ सत्ता में आयी तो दिल्ली में बिजली के दाम आधे हो जायेंगे, साथ ही विद्युत् वितरण कम्पनियों के खातों की कैग द्वारा जांच भी करवाई जायेगी।  इसलिए जैसे ही ‘आप’ की सरकार दिल्ली में आयी, उसने अपने वादे पूरे करने शुरू कर दिए, साथ ही कैग द्वारा जांच की सिफारिश भी कर दी गयी।

अचानक ३० तारीख को दिल्ली में बिजली सप्लाई करने वाली कम्पनियों बी एस ई एस और टी डी डी पी एल के द्वारा सरकार को सूचित किया गया कि पर्याप्त पूंजी न होने के कारन उन्हें  बिजली खरीदी में दिक्कतें हो रही हैं इसलिए उन्हें दिल्ली में ६-८ घंटे प्रतिदिन की बिजली कटौती करनी होगी। यही नहीं बी एस ई एस यमुना पॉवर लिमिटेड द्वारा ८ प्रतिशत टेरिफ सरचार्ज, बी एस ई एस राजधानी पॉवर लिमिटेड द्वारा ६ प्रतिशत एवं टाटा पॉवर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड द्वारा ७ प्रतिशत टेरिफ सरचार्ज में वृद्धि कि घोषणा  भी कर दी गई जो १ फ़रवरी से लागु होंगी। दिल्ली इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन भी इसे मंजूरी दे चुकी है।  डी ई आर सी के अनुसार ऐसा बिजली कम्पनियों के वित्तीय घाटे को पूरा करने हेतु जरुरी था।

दिल्ली वालों पर दोहरी मार तब पड़ी जब दिल्ली में दूध सप्लाई करने वाली कंपनी मदर डेरी ने १ फ़रवरी से सभी किस्म के दूध के दामो में २ रुपये  प्रति लीटर वृद्धि की घोषणा कर दी, साथ ही रही सही कसर डीजल के दामों में ५० पैसे प्रति लीटर की वृद्धि ने पूरी कर दी। लोगों का बजट तो बिगड़ना ही था। इधर भाजपा और कांग्रेस ने सारा ठीकरा आम आदमी पार्टी की सरकार पर ठोकने में जरा भी देरी नहीं लगाई, दोनों का कहना है कि दिल्ली में बिजली के दामों में बढ़ोत्तरी आम आदमी पार्टी कि सरकार के कारन हुयी है। हालाँकि दिल्ली सरकार का कहना है कि, बिजली वितरण कम्पनियां जान बूझ कर ऐसा कर रहीं हैं ताकि सरकार कैग जांच करवाने से अपने कदम वापिस खींच ले. अगर बिजली कम्पनियां अपनी हरकतों से बाज नहीं आयीं, तो मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने बिजली कम्पनियों के लाइसेन्स तक रद्द करने की बात कही है। अब आगे देखना है कि निकट भविष्य में दिल्ली की बिजली राजनीती कहाँ तक जाती है।

इस्माइल..

Photo: http://www.indiatvnews.com/

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About ishmile khan

A Pen is always mightier then a Sword; that's what Ismail believes. He operates many blogs, social sites pages and writes for social issues & causes. Active member of PETA, AHRC, Greenpeace, Save arctic, world peace organizations and similar fields.

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