नेताओ की आपसी “तू-तू मै-मै” में कहीं देश पीछे न छूट जाये

जैसे जैसे लोकसभा चुनाव करीब आ रहे है, इस देश के राजनैतिक माहौल में भी उबाल आ रहा है. राजनैतिक बयानबाज़ी तेज़ हो रही लेकिन व्यक्तिगत आरोप प्रत्यारोप लगाये जा रहे. देश में बड़ी बड़ी रैलीयां की जा रही है और इन रैलीयों में जनता के सामने बीजेपी और कांग्रेस के नेता एक दुसरे की सच्ची झूठी गलतियाँ गिना रहे. रैली में भीड़ भी जुट रही है तो नेताओ का अपने प्रतिद्वंदियों को खरी खोटी सुनाने का जोश भी बढ़ रहा है. लेकिन इन सब बातो में कहीं देश के मुद्दे न पिछाड जाए, इस बात का भय लगता है.

awaz_4 (300x180)लोकतान्त्रिक देश की राजनीति में आलोचना का बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण स्थान है. लेकिन जब आलोचना नीतियों की न हो कर व्यक्तियों की होने लग जाए, तो देश के महत्वपूर्ण मुद्दे पिछडते हुए नज़र आते है. आज चुनाव नीतियों के आधार पर नहीं, नेताओ के व्यक्तिगत क्षमताओं के आधार पर हो रहा है, जो लोकतंत्र के लिए घातक साबित हो सकता है. पिछले कई दिनों से कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी और बीजेपी से प्रधामंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी की विशाल जन सभाएं हो रही है. इन जन सभाओ में भीड़ जुट भी रही है और जुटाई भी जा रही है. मीडिया का भी अच्छा ख़ासा कवरेज मिल रहा है. लेकिन लोग इन नेताओ से ये नहीं सुनना चाहते है की उनके प्रतिद्वंदी ने क्या गलतियां की, लोग ये सुनना चाहते है की आप सत्ता में आने के बाद इन गलतियों को कैसे सुधारेंगे.

आज के राजनैतिक परिदृश्य में जनता के मुद्दों को अहमियत कम और व्यक्तिगत क्षमताओं पर अहमियत ज्यादा नज़र आती है. चुनाव में सड़क, पानी, बिजली, शिक्षा आदि मूलभूत मुद्दों पर कोई व्यापक चर्चा नहीं की जा रही. सारे नेता इन मुद्दों को समस्या के रूप में स्वीकार करते है, लेकिन इन मुद्दों पर समाधान की दिशा में  कोई भी नेता कुछ भी नहीं कहता. आज देश का युवा समस्या पर चर्चा नहीं करना चाहता, समाधान पर चर्चा चाहता है. लेकिन नेताओ की आपसी तू तू मै मै में समस्याओ के समाधानो पर चर्चा हो नहीं पा रही.

बात यदि भारत के वर्तमान और भविष्य की होती तो शायद इस देश की जनता में ये विश्वास जगता की इस देश का अब कुछ भला होगा, लेकिन पिछले कुछ दिनों में नरेन्द्र मोदी, प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह और नितीश कुमार जिस प्रकार से इतिहास को लेकर बयानबाजी कर रहे है, इन सब से निराशा होती है. इतिहास को कभी बदला नहीं जा सकता है, लेकिन वर्त्तमान और भविष्य को बदलना ये इंसान के बस में है. लेकिन जब लड़ाई इस बात पर छिड जाये की किसका  इतिहास सही है और किसका गलत, तब लगने लगता है की भारत का भविष्य क्या इन नेताओ के हाथ सुरक्षित है?

बहरहाल 2014 का चुनाव किन मुद्दों पर लड़ा जायेगा ये तो आनेवाला वक्त ही बतायेगा, लेकिन देश की जनता को ये सुनिश्चित करना होगा की बिजली सड़क, शिक्षा, रोजगार, पानी, भ्रष्टाचार, व्यवस्था परिवर्तन आदि मुद्दे, चुनाव में मतदान का आधार बने. जो लोग इतहास की आड़ में देश के भविष्य को नज़र अंदाज़ कर रहे है, उन्हें ये आभास करना आवश्यक है की देश की जनता उज्वल भविष्य चाहती है, आपसी तू तू मै मै और इतिहास की बातो पर लड़ाई नहीं.

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About Yogesh Mandhani

Businessman by Profession, Journalist by Passion. Began Social life with Janlokpal Agitation led by Anna Hazare, now working for a media which will work without any fear or favour. Report all the news and views which affects common man of this nation. Also if any hard evidence is available, I would like to write on any issue which is concealed by Mainstream Media for reasons what so ever. It gives immense satisfaction and pleasure working at Awaz Aap Ki.

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