भारत रत्न के सम्मान में छिपा दर्द

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“Bharat Ratna” Prof. C. N. R. Rao

प्रोफ़ेसर सी. एन. आर. राव को हाल ही में देश का सर्वोच्च पुरूस्कार “भारत रत्न मिला जो उनकी वैज्ञानिक प्रतिभा को देश के नेतृत्व का सम्मान था लेकिन सम्मान मिलने के कुछ ही घंटे बाद प्रोफ़ेसर राव उन्हीं राजनेताओं के निशाने पर आ गए जिन्होंने उनकी प्रतिभा को यह सम्मान दिया था। कारण था प्रोफ़ेसर राव का वह कथित बयान जिसमे उन्होंने नेताओं को मूर्ख बताया था और अनुसंधान के लिए संसाधन मुहैया ना कराने की सरकारी नीति को मूर्खतापूर्ण।प्रोफ़ेसर राव कोई राजनीतिज्ञ नहीं हैं बल्कि वे एक सीधे साधे व्यक्ति हैं जो विज्ञान के क्षेत्र में अपनी क्षमता का लोहा मनवा चुका है इसलिए उनके बयान को राजनैतिक दृष्टि से देखना गलत होगा।

प्रोफ़ेसर राव के बयान को समझने से पहले उसके सन्दर्भ और प्रोफ़ेसर राव को समझना जरूरी है। 30 जून 1934 को बंगलुरु में जन्मे प्रो. चिंतामणि नागेश रामचंद्र राव सॉलिड स्टेट और मैटिरियल कैमिस्ट्री के ज्ञाता हैं। उनके अब तक 1400 से अधिक शोधपत्र और 45 किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। प्रोफ़ेसर राव ऐसे पहले भारतीय हैं जो शोधकार्य के क्षेत्र में 100 के एच-इंडेक्स में पहुंचे हैं, यह लगभग उतना ही महत्वपूर्ण है जितना क्रिकेट के क्षेत्र में सचिन के 100 शतक। दुनिया के 60 विश्वविद्यालयों से राव को डाक्टरेट की मानद उपाधि मिल चुकी है। वैज्ञानिक समुदाय में उनकी धाक एक आइकन की तरह है। उन्हें भारत सरकार द्वारा ही 1974 में पद्मश्री और 1985 में पद्मविभूषण से सम्मानित किया गया है। भारत चीनी विज्ञान सहयोग को बढ़ावा देने के लिए इसी साल जनवरी में उन्हें चीन के सर्वश्रेष्ठ विज्ञान पुरूस्कार से नवाजा गया।

प्रो. राव ने ट्रांजिशन मेटल ऑक्साइड सिस्टम, मेटल इन्सुलेटर ट्रांजिशन, सीएमआर मेटेरियल, सुपरकंडकटिविटी, नैनोट्यूब, ग्राफीन, नैनोमैटेरियल, और हाइब्रिड मैटिरियल के क्षेत्र में काफी शोध और अनुसंधान किये हैं। किसी वैज्ञानिक की प्रतिभा का असली सुबूत माने जाने वाला कारक यह भी है कि उसके शोधपत्रों का द्रष्टान्त के रूप में कितना उल्लेख किया गया है। प्रोफ़ेसर राव दुनिया के उन चुनिन्दा वैज्ञानिकों में हैं जिनके शोधपत्रों को पचास हजार से अधिक बार उल्लिखित किया जा चुका है। राव इंदिरा गांधी की वैज्ञानिक सलाहकार परिषद् के सदस्य रह चुके हैं। इसके अलावा राजीव गाँधी, एचडी देवेगौडा, आइके गुजराल के समय भी वे परिषद् से जुड़े रहे।

अब बात उनके बयान और उसके सन्दर्भ की करें तो उनकी इस बात में कोई दो राय नहीं है कि भारत में वैज्ञानिक अनुसंधान को उतना महत्त्व नहीं दिया जाता जितना दिया जाना चाहिए और आंकड़े इसके गवाह हैं। वैज्ञानिकों इंजीनियरों की संख्या के हिसाब से विश्व का तीसरा देश होते हुए भी अनुसंधान के क्षेत्र में पश्चिमी देशों का बोलबाला है। इसके कई कारण हैं जैसे जहाँ एक ओर विकसित देश रिसर्च फंड का तीस प्रतिशत तक विश्वविद्यालयों को देते हैं वहीँ हमारे देश में यह आंकडा केवल छह प्रतिशत है। इसके अलावा विज्ञान के क्षेत्र में किस तरह काम यह तय करने का काम वैज्ञानिकों के बजाय नौकरशाहों के हाथ में होना भी एक बड़ी समस्या है। उचित मान सम्मान ना मिलना एक और कारण है।

इन सभी कारणों से एक महान संभावनाओं वाला देश होते हुए भी हम कम उपलब्धियों वाले देशों में हैं। हमारे शीर्ष इंजीनियरिंग और विज्ञान संस्थान दुनिया के सौ संस्थानों में भी जगह नहीं बना पाते।यह विडंबना ही है कि मनोरंजन जैसे क्षेत्र में पैसा लगाने वालों की कमी नहीं पर शोध में पैसा लगाने से सरकार भी हिचकिचाती है।

फिलहाल यह कहना कठिन है कि हमारे राजनेता इस बात पर कितना विचार करेंगे कि हमारे देश में शोध को बढ़ावा कैसे मिले? खास तौर पर तब जबकि राजनैतिक असहनशीलता के दौर में भारत रत्न जैसे पुरुस्कारों का भी राजनीतिकरण कर दिया गया है। ऐसे में केन्द्रीय मंत्री जयपाल रेड्डी बधाई के पात्र हैं जिन्होंने इस सत्य को स्वीकारा कि प्रोफ़ेसर राव का कहना ठीक है परन्तु सच को स्वीकारना समस्या का समाधान नहीं हैं। प्रोफ़ेसर राव को भारत रत्न देने का अर्थ तभी है जब हम उनकी बात में छुपे दर्द को समझते हुए उज्जवल भविष्य के लिए काम कर सकें।

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About Satish Sharma

Satish Sharma is Editor, Hindi of Awaz Aapki. Writes in many News Papers & Magazines as Columnar, Analyst. Like to work as Citizen Journalist. Doing his bit of work in raising voice of unheard. Currently he is managing two shows of Awaz Live TV named Mashal and Manthan also.

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