अब एक और डायरी

birlaअब एक और डायरी मार्केट में आ गयी है . नए साल वाली नहीं.  श्री कुमार मंगलम बिरला जी की.  यह डायरी भी बहुत मारू चीज है . महान लोग डायरी लिखते हैं. वह स्कूल के कोर्स में लग जाती हैं . हीरो डायरी लिखता है वो फिल्म बन जाती है .नाम गजनी.  कोई पत्रकार जेल जाता है .डायरी लिखता है ”जानेमन जेल” . हिरोइन बिस्तर पर लेट कर जो डायरी लिखती है , उस के बारे में कुछ न ही लिखूं तो ठीक है.

डायरियां अनुमन खुद के लिए ,मतलब अपने पढ़ने के लिए ही लिखी जाती हैं , मगर दूसरों की डायरी पढ़ने जो आंनद (मजा) है वह शब्दातीत है . सामने वाला अपने आप निवस्त्र होता जाता है . डायरी पढ़ते ही फिल्म में नया मोड आ जाता है , परिवार में कलह हो जाती है . वकील की आमदनी हो जाती है .

मगर ये डायरी लिखने का काम तो सुकोमल  नायिकाओं का , पिटे हुए नेताओं का और हम जैसे लिकखड लोगों का है . व् यापारियों का काम तो पर्चिओं से ही चल जाता है फिर आपने डायरी क्यों लिखी ? अब भुगतो .

महान नेताओं और पार्टिओं को चुनाव के वक्त पैसा ( दान ) दिया . अच्छा किया . पैसा देने के बाद भूल क्यों न गए . नेकी कर दरिया में डाल वाली कहावत नहीं सुनी थी क्या ? .चलो कोई बात नहीं.  पैसा देने के बाद रसीद ली थी क्या ?  नहीं ली न ?  अब भुगतो .

नेता जी ने या उनकी पार्टी ने , आपके पैसों को अपने एकाउट में  दिखाया ?  नहीं दिखाया ?  तो अब पुलिस और सी बी आई क्या जाँच करे ? .क्या सबूत पेश करे ? क्या उन के यहाँ डायरी की खोज करे ? ( ये नहीं हो सकता ) आप भी अजीब हैं , सालों से पुलिस और सी बी आई कोयला कांड में आप के पीछे लगी है और आप एक डायरी ठिकाने नहीं लगा सके . अब भुगतो .

करोड़ों  रुपए आपके ऑफिस से नकद मिले . आपके अकाउंटेंट को पता ही नहीं की कहां से आए और किस काम के लिए आये . आप महान हैं .  मान लिया कि पैसे हमारे हैं और हम सरकार को इस पैसे पर टेक्स दे देंगें . ( क्या तरुण तेजपाली न्याय है )

सब आपकी  इमानदारी से परिचित हैं .  सी बी आई को इस डायरी मिलने की खबर को पहले कितने लोगों ने छापा था .  किस टी वी चेनल पर इस पर चर्चा हुई . किसी पर नहीं .  सारे व्यपार  मंडल आपके पक्ष में खड़े हो गए .  पार्टी लाइन भूल कर ,सभी नेता आपके साथ खड़े हो गए .  सरकार के मंत्रिओं तक ने ये नहीं कहा कि कानून अपना काम करेगा ,यही कहा कि बिरला जी के साथ गलत हो गया .

मुझे विश्वास है कि आपने सभी दलों के नेताओं को पैसा दिया होगा . अब लीजिए अपने समदर्शी होने का आंनद  . कोई नेता नहीं चाहेगा कि उसका नाम उजागर हो .  खुद को बचाने के चक्कर में दूसरा तो अपने आप ही बच जाएगा . आप तो निश्चिंत रहिये . आप से तो सब डरेंगे . कहीं आप डायरी की तिथी वार व्याख्या न करने बैठ जाए ( आप ऐसा कभी नहीं कारेगे ऐसा मुझे पूरा विश्वास है .आपको भी तो जिन्दा रहना है और धंधा चलाना है )

आप शुद्ध व्यापारी हैं रुपया दिया तो सवा लेना बनता है .  देखो, इस से इंकार न करना . ये तो धंधे की बात है .आपने जितना पैसा दिया उससे ज्यादा कमा लिया . व्यपार की बात है.  धर्म की बात है  .मगर ये रूपये पैसे की बात कम्पनी के बही खाते में लिखते न . डायरी में क्यों लिखा .

मैने पहले ही कहा है डायरी लिखना आप का काम नहीं हैं . आप व्यापारी हो .  बही खाते लिखो . सही से लिखो .और डायरी में लेन देन का हिसाब लिखना तो डायरी का भी अपमान है .

अब मैं बिरला मंदिर जा रहा हूँ आप लक्ष्मी नारायण मंदिर हो आओ .बात समझ आए तो पत्र लिखना या लाइक दबा देना .

अशोक उपाध्याय

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