नीडो तानिया : अपनों में ही बेगाने

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क्या आप जानते हैं कि, भारतवर्ष में ही रहने वाले बहुत से लोग और कुछ राज्य आज भी बेगानापन झेलने को मजबूर हैं। ये बेगानापन उनका अपना चयन नहीं है बल्कि ये तो उनपर लाद दिया गया है जबरदस्ती, और शर्म की बात तो ये है कि ये ज्यादती किसी और ने नहीं बल्कि उनके ही देशवाशियों ने की है, हमने ही की है। अब तक आप लोग समझ चुके होंगे कि हम किसकी बात कर रहें हैं, हम बात कर रहे हैं भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों के बारे में, वहाँ के लोगों के बारे में, उनपर होने वाले अत्याचार के बारे में, उन्हें अपने ही देश में पराया कहलाने को अभिशप्त होने के बारे में, उस मासूम “नीडो तानिया” के बारे में जिसे बेरहमी से सिर्फ इसलिए मौत के घाट उतर दिया गया क्योंकि वो पूर्वोत्तर राज्यों से आता था, हमसे कुछ अलग दीखता था।  कहाँ गयी हमारी सहष्णुता और कहाँ गयी हमारी मानवता?

अगर हम पिछले १० वर्षों के घटनाक्रम पर ही नजर डालें तो हमे ऐसी एक नहीं बल्कि सैंकड़ों घटनाएं मिलेंगी।  याद कीजिये २०१२ को जब बंगलुरु में एक पूर्वोत्तर राज्य का नवयुवक संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाया गया था। उस घटना के बाद अफवाहों और अटकलों का ऐसा तूफ़ान उठा था जिसने बड़ी संख्या में पूर्वोत्तर के छात्रों को पलायन करने पर मजबूर कर दिया था और जिसके कारन सरकार को मोबाइल मेसेज भेजने पर कुछ दिनों के लिए पाबन्दी लगानी पड़ी थी। २००९ की घटना याद कीजिये जब एक १९ वर्षीया मणिपुरी लड़की को देश की राजधानी दिल्ली में चलती कार के अंदर बलात्कार का शिकार होना पड़ा था। ७ वर्षीया नागालैंड की बच्ची को बलात्कार के बाद बेरहमी से मार दिया गया हमारी दिल्ली में! उसके अपने ही देश में! आखिर क्यों ? जरा अपने दिलों के अंदर झांक कर देखिये और सोचिये इसके कारणो को ! वहाँ के अनेक खिलाडियों ने अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत के मस्तक को ऊँचा किया है, क्या आप भूल सकते हैं मैरीकॉम को? क्या आप भूल सकते हैं वाइचुंग बुटिआ को? पूर्वोत्तर

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भारत के सातों राज्य सात बहनों के नाम से भी पसिद्ध हैं, ये ७ राज्य हैं आसाम, नागालैंड, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, त्रिपुरा और मेघालय। ये सातों राज्य मिलकर भारत के क्षेत्रफल का लगभग ७ प्रतिशत हैं एवं भारत की लगभग ३.५ प्रतिशत से भी ज्यादा आबादी यहाँ निवास करती है। इन भारतीय राज्यों को कुदरत ने भरपूर खूबसूरती बक्शी है, यहाँ की प्राकर्तिक छठा हर किसी को आमंत्रित करती है, सर्वाधिक बारिश के लिए मशहूर ‘चेरापूंजी’ भी यहीं है। यहाँ के लोगों का भोलापन, सादगी और मेहमान नवाजी हर किसी का दिल मोह लेती है, हमे गर्व होना चाहिए भारत के इन राज्यों और यहाँ रहने वाले अपने भारतीय भाई बहनो पर, ना कि उन्हें अपमानित करना चाहिए।

भारत सरकार को भी चाहिए कि देश की  जनता को ज्यादा से ज्यादा पूर्वोत्तर के राज्यों के बारे में बताये। इसके लिए सरकार को हमारी पाठ्य पुस्तकों में कुछ पाठ पूर्वोत्तर राज्यों के बारे में और वहाँ के लोगों, वहाँ के जीवन के बारे में शामिल करना चाहिए जिससे हमारे बच्चे और युवा वहाँ की ज्यादा से ज्यादा जानकारी पा सकें। इसी तरह पूर्वोत्तर राज्यों के स्कूली पाठ्यक्रम में भी भारत के दूसरे राज्यों की जानकारी का समायोजन किया जाना चाहिए। ये छोटा सा कदम ही हमे आपस में जोड़ने की एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा। तब लोग एक दूसरे को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे और वैमनस्य स्वयं ही ख़त्म होता जायेगा। हम सबकी ये जिम्मेदारी है कि हमारे पूर्वोत्तर के भाई-बहनो का ध्यान रखें, उन्हें अपना मानें और फिर आप देखना वो लोग बदले में वे हमे कितना स्नेह देते हैं।  ध्यान रखें कि, अब कोई बहन अपने ही देश में अपमानित न होने पाये, फिर कोई “नीडो तानिया” अपनों के द्वारा ही न मारा जाय।

 

इस्माइल।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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About ishmile khan

A Pen is always mightier then a Sword; that's what Ismail believes. He operates many blogs, social sites pages and writes for social issues & causes. Active member of PETA, AHRC, Greenpeace, Save arctic, world peace organizations and similar fields.

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