अन्ना को खुला पत्र, राजनीती के माध्यम से ही मिलेगा जनलोकपाल

letter to anna hazare, Anna to fast again for janlokpalआदरणीय अन्नाजी,

कल समाचार चैनल के माध्यम से सुचना मिली की आप जनलोकपाल के लिए फिर से आन्दोलन को तेज़ करने जा रहे है और 10 दिसम्बर से फिर अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठ रहे है. 76 वर्ष की आयु में आपका ये ज़ज्बा प्रेरणादायक है. लेकिन पिछले कई दिनों से आप के स्वास्थ्य को लेकर भी आपके शुभ चिन्तक काफी चिंतित है. बढती उम्र और ख़राब तबियत के बीच आपके इस अनशन के समाचार को सुन कर बहुत सारे लोग चिंतित हो गए.

जनलोकपाल आन्दोलन से पहले भी आपने कई बार अनशन किया और उसी प्रयास के बदौलत देश को सुचना का अधिकार मिला. इसी सुचना के अधिकार की वजह से देश में हो रही भ्रष्टाचार की अनगिनत घटनाये देश सामने आ रही है. जहाँ तक मेरी समझ है और आप भी इस बात पर सहमत होंगे की देश में सत्ता और विपक्ष दोनों की सांठ गाँठ के बगैर भ्रष्टाचार नहीं हो सकता. और इस देश की कोई राजनैतिक पार्टी ऐसे किसी कानून को पारित नहीं करेगी जिससे उनका नुकसान हो. अब सवाल ये उठेगा की सुचना का अधिकार कानून भी इन्ही पार्टियों को नुकसान पहुंचा रहा है, फिर यह कानून कैसे पास हो गया? इसका उत्तर बहुत ही सरल है. सुचना के कानून के तहेत हम सिर्फ भ्रष्टाचार की पोल खोल सकते है, लेकिन सजा दिलवाने के लिए उस भ्रष्टाचार के खिलाफ हमे उन्ही अदालतों में जाना पड़ता है जहाँ लालू यादव को सैकड़ो करोड़ के चारा घोटाले की सजा 17 साल बाद मिली और घोटाले की रकम वसूल करने की कोई कार्यवाही नहीं हो रही. तो कुल मिला कर नेताओ को ये लगा की सुचना के कानून के बाद भी अन्ना और उनके जैसे क्रन्तिकारी उनका ओनके भ्रष्टाचार का कुछ नहीं बिगाड़ पायेंगे. शायद इस वजह से सूचना का अधिकार कानून पास हुआ.

लेकिन जनलोकपाल बिल एक ऐसा कानून है जिससे इन नेताओ को कम समय में अपने पापो की सजा मिलेगी और भ्रष्टाचार से अर्जित किया हुआ पैसा वापस देश को मिल जायेगा. शायद इसी की वजह से वर्त्तमान की पार्टिया जन लोकपाल बिल को पारित नहीं होने देंगे. आपने स्वयं 4 बार अनशन किये, कई बार प्रधानमंत्री को चिट्टी लिखी, लाखो लोग रामलीला मैदान की अगस्त क्रांति में जुड़े थे, फिर भी जनलोकपाल पास होने का कहीं कोई संकेत नज़र नहीं आ रहा. इन सब बातो को ध्यम में रख कर, मुझे ये लगता है की अब आन्दोलन के रास्ते से जन लोकपाल नहीं मिलेगा. राजनीति ने इन नेताओ को इतना असंवेदनशील और बेशर्म बना दिया है की किसी भी आन्दोलन को धोका देने में नहीं हिचकिचाते. इसलिए मेरा आपसे अनुरोध है की अब अनशन और आन्दोलन करके आप अपने स्वस्थ्य को और न बिगाड़े.

अब सवाल ये उत्पन्न होगा की अनशन और आन्दोलन से जनलोकपाल नहीं मिलेगा तो फिर किस रास्ते से मिलेगा. मुझे लगता है की जब तक संसद और विधानसभाओ में आपकी बात को दोहराने वाला कोई नहीं पहुंचेगा, तब तक जनलोकपाल बिल पास होना तो दूर, उस पर सदन में चर्चा भी नहीं होगी. वर्तमान की पार्टियों में आप की बात संसद में दोहराने की हिम्मत किसी पार्टी के सांसद में नज़र नहीं आती. इस लिए मेरा आपसे अनुरोध है की कुछ उम्मीदवारों को आप चुन कर चुनाव लडवायें और ये लोग जीतने के बाद जनलोकपाल साहित व्यवस्था परिवर्तन के मुद्दों पर सदन में आपकी आवाज़ बनेंगे. आपने 25 जुलाई 2012 के वक्त भी एक ऐसा ही निर्णय लिया था. लेकिन पता नहीं किन कारणों से आपने अपनी ही बात को पलट दिया. आज आपके उस पार्टी से क्या सम्बन्ध है, ये मै नहीं जानता. लेकिन यदि आपकी निष्ठा उस पार्टी या फिर पुरे पार्टी तंत्र पर से ही उठ गयी है, तो कुछ निर्दलीय उम्मीदवारों को संसद में भेजिये. सरकार किसकी बनेगी इस पचड़े में न पड़कर ये लोग केवल जनलोकपाल और व्यवस्था परिवर्तन के लिए संघर्ष करेंगे. या फिर इस देश में ऐसी पार्टियों या नेताओ से बात की जा सकती है जो व्यवस्था परिवर्तन के मुद्दे पर आपकी विचारधारा से पूर्ण रूप से सहमत हो.

अब इन उम्मीदवारों का चयन कैसा होगा और जीत के बाद वो किसी और पार्टी से न जुड़े, इन सब बातो पर चर्चा कर रास्ते खोजो जा सकते है. लेकिन केवल आन्दोलन के रास्ते से अब जनलोकपाल मुझे दूर दूर तक नज़र नहीं आता. मेरा स्पष्ट रूप से मानना है की अब अगर जनलोकपाल मिलेगा, तो वो केवल राजनीति के माध्यम से मिलेगा. राजनीती ने नेताओ की चमड़ी को बहुत मोटा बना दिया है. आपके अनशन से हम जैसे आम लोगो को तकलीफ होती है, लेकिन इन नेताओ को कोई फर्क नहीं पड़ता. इस लिए मेरा आपसे और आपके सलाहकारों निवेदन है की मेरे दिए गए सुझाव पर आप गौर करे और अपने विवेक से फैसला ले.

आपका और देश का एक हित चिन्तक…

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About Yogesh Mandhani

Businessman by Profession, Journalist by Passion. Began Social life with Janlokpal Agitation led by Anna Hazare, now working for a media which will work without any fear or favour. Report all the news and views which affects common man of this nation. Also if any hard evidence is available, I would like to write on any issue which is concealed by Mainstream Media for reasons what so ever. It gives immense satisfaction and pleasure working at Awaz Aap Ki.

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