बस यूँ ही – भूखजीवी और बुद्धिजीवी

awaz_7 (300x206)शहर के एक मोड़ पर भूखजीवी और बुद्धिजीवी टकरा गए. हाल चाल पूछने बैठे तो बात महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी और भुखमरी के आँगन में जाकर फ़ैल गई. भूखजीवी परेशान होने लगे तो बुद्धिजीवी समस्या की जड़ तक पहुँच गए और एक कहानी सुनाने लगे. सुनिए उन्हीं की जुबानी-

एक किसान को फार्म हाउस पर प्रबंधक की जरूरत थी. इश्तिहार दिया तो दूर दूर से व्यक्तियों ने संपर्क किया. एक युवक नौकरी के लिए किसान को उपयुक्त लगा.

किसान ने पूछा-“तुम में ऐसा क्या ख़ास है कि मैं तुम्हे नौकरी पर रखूँ?”

युवक बोला- “मैं उसीबत के समय भी आराम से सो सकता हूँ.”

किसान को उत्तर अजीब लगा लेकिन युवक किसान को अच्छा लगा था तो किसान ने उसे नौकरी दे दी. कुछ सप्ताह बाद एक रात किसान और उसकी पत्नी तूफ़ान के शोर से उठा गए. उन्होंने युवक को अवाज लगाईं लेकिन वह गायब था. जब मालिक ने उसके कमरे में जाकर देखा तो वह आराम से सो रहा था और बहुत जगाने पर भी नहीं जागा. अब मालिक ने खुद ही चलकर फ़ार्म हाउस का हाल देखने का निर्णय लिया.

किसान ने देखा कि फार्म हाउस के सभी शटर ठीक से बंद हैं, लकड़ी का सब सामान आग वाले स्थान से दूर है. सभी उपकरण अन्दर रखे हुए हैं. गेंहूँ की फसल इस प्रकार रखी है कि बरसात उस तक ना पहुंचे. ट्रैक्टर गैराज में हैं. पशुओं के पास चारा है. अब फ़ार्म हाउस के मालिक को युवक की बात का मतलब समझ में आया.

तो भैया यही हाल हमारे लोकतंत्र का है. यहाँ भी नौकर लोग मुसीबत के समय आराम से सोते हैं लेकिन मुसीबत के पहले की तैयारी करना भूल जाते हैं.

कहानी सुनकर भी न भूखजीवी की ना भूख मिटी न महंगाई कम हो पाई. बस एक जाल का सिरा पकडे पकडे महाशय घर पहुंच गए जहाँ एक बीवी और तीन भूखे बच्चे उनका इन्तजार कर रहे थे.

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About Satish Sharma

Satish Sharma is Editor, Hindi of Awaz Aapki. Writes in many News Papers & Magazines as Columnar, Analyst. Like to work as Citizen Journalist. Doing his bit of work in raising voice of unheard. Currently he is managing two shows of Awaz Live TV named Mashal and Manthan also.

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