केदारनाथ का दोषी कौन ? भाग 4 (मीडिया की नजर से)

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उत्तराखंड में १६ जून २०१३ को हुए हादसे के बाद सरकार की ओर से दावों और वादों की जैसे झड़ी लग गई लेकिन एसी कमरों में बनी योजनायें धरातल पर कितनी उतर पाई हैं. उत्तराखंड में ताजा हालात को लेकर आवाज आपकी की जांच में कुछ चौंकाने वाले तथ्य सामने आये हैं जिन्हें हम लगातार आपके सामने रखते रहेंगे. लेकिन उसके पहले १६ जून से लेकर अब तक सरकार द्वारा किये गए दावों को लेकर और उनके क्रियांवयन को लेकर अब तक मुख्य अखबारों में छपी खबरों के माध्यम से इसे समझने का प्रयास करेंगे जिसकी चौथी कड़ी (पढ़िए पहली कड़ी) (पढ़िए दूसरी कड़ी) (पढ़िए तीसरी कड़ी)आपके सामने हैं:-

उत्तराखंड में खुली सरकार की पोल

27 July 2013, बार-बार प्रकृति का प्रकोप झेलने वाले उत्तराखंड में आखिर आज तक क्यों नहीं बनी एनडीआरएफ की बटालियन? प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए गठित की गई एनडीआरएफ की बटालियन देश के 10 शहरों गुवाहाटी, कोलकाता भुवनेश्वर चेन्नई पुणे गांधीनगर बठिंडा गाजियाबाद पटना और गुंटूर में है। लेकिन प्राकृतिक आपदाओं के भीषण खतरे के बावजूद उतराखंड के लिए अभी तक सिर्फ प्लानिंग ही हो रही है यानी बिहार और आंध्र प्रदेश में गठन के बाद भी उत्तराखंड को इसका इंतजार है। इस घातक ढुलमुल रवैये के लिए राज्य सरकार भी खासी जिम्मेदार है। राज्य की शायद सबसे बड़ी जरूरत के लिए सरकार का यह रवैया चौंकाने वाला है। यह कहने की जरूरत नहीं कि अगर उत्तराखंड में ही NDRF की बटालियन स्थापित होती तो मदद जल्दी पहुंचती और नुकसान कम होता लेकिन प्यास लगने पर कुआं खोदने की सरकारी नीति के चलते जो सबसे जरूरी था नहीं हुआ।

उत्तराखंड जनता ने फटे कपड़े, गंदे चावलों की राहत सामग्री ठुकराई

जुलाई 29, 2013, उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदा का सामना कर रहे लोगों ने फटे कपड़े और गंदे चावलों की राहत सामग्री को ठुकराते हुए कहा कि यह राहत सामग्री किसी काम की नहीं है। राहत के तौर पर दिए जा रहे चावलों में कीड़े हैं और ज्यादातर कपड़े फटे हुए हैं।

उत्तराखंड राहत कार्य के नाम पर फर्जीवाड़ा

30 July 2013, इंडियन एयरफोर्स ने दिल्ली पुलिस के पास शिकायत दर्ज करवाई है कि उसके नाम से इंटरनेट और फेसबुक पर फर्ज़ी पेज बनाए जा रहे हैं जिनमें बाढ़ पीड़ितों की मदद के नाम पर आम जनता से पैसा लूटा जा रहा है। पुलिस ने धारा-420 और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

केदारनाथ से लौट रहे एसडीएम नदी में बहे…

31 July 2013, बुधवार को केदारनाथ से साफ-सफाई के कामों का जायजा लेकर लौट रहे एसडीएम अजय अरोड़ा मंदाकिनी नदी के तेज बहाव में बह गए हैं। एसडीएम मंदाकिनी नदी को पार करने के लिए उसपर बने अस्थायी पुल पर चढ़े थे। नीचे नदी का बहाव काफी तेज था, जबकि अस्थायी पुल भी महज लकड़ी के एक बड़े फट्टे को डालकर बनाया गया था। नदी पार करते समय एसडीएम अजय अरोड़ा का पैर इस फट्टे पर से फिसल गया और वे नीचे बह रहे तेज पानी में गिर गए।

उत्तराखंड तबाही: टैंट में जिंदगी बिता रहे हैं लोग

12 August 2013, त्रासदी ने टिहरी के हडियाना मल्ला गांव के 80 से ज्यादा लोगों का आशियाना छीन लिया जो अब एक टेंट के नीचे जिंदगी बिताने को मजबूर हैं। इन लोगों को शिकायत है सरकार से जो मदद के नाम पर इन्हें टेंट देकर भूल गई। करीब 26 परिवार डेढ़ महीने से इस टेंट के नीचे जिंदगी बिता रहे हैं। ना खाने का कोई इंतजाम है, ना ही पीने के लिए पानी का लेकिन हैरानी इस बात की है कि प्रशासन को इनकी खबर तक नहीं। सरकारी कागजों की माने तो इस तबाही ने सिर्फ एक ही परिवार का आशियाना छीना है लेकिन जब सच्चाई तस्वीरों में दिखाईं तो अब मदद का भरोसा दे रहे हैं।

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About Satish Sharma

Satish Sharma is Editor, Hindi of Awaz Aapki. Writes in many News Papers & Magazines as Columnar, Analyst. Like to work as Citizen Journalist. Doing his bit of work in raising voice of unheard. Currently he is managing two shows of Awaz Live TV named Mashal and Manthan also.

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