घर के शेर, बाहर ढेर!

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भारतीय क्रिकेट टीम इस वक़्त दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर है. दक्षिण अफ्रीका का दौरा हमेशा एक चुनौती माना जाता है क्योंकि भारतीय उपमहाद्वीप की सुस्त एवं धीमी पिचों पर जीत की अभ्यस्त भारतीय बल्लेबाजी, वहाँ की आग उगलती हरी घास वाली सतह पर हमेशा ही अपने को असमर्थ पाती है. इस बार भारतीय टीम से बहुत सारी अपेक्षाएं थी क्योंकि पिछले कुछ महीनो से भारतीय टीम आने वाले हर मेहमान टीम पर भारी पड़ रही थी. शिखर धवन, रोहित शर्मा एवं विराट कोहली के बल्लो से ऐसी आग निकल रही थी मानो हर गेंदबाज़ गेंद डालने से पहले ही स्वाहा हो जायगा. अब ऐसे में यह उम्मीद तो बनती ही थी कि इस बार भारतीय टीम अफ्रीकी गेंदबाजी का करारा जवाब देगी. परन्तु उम्मीद के उलट भारतीय शीर्ष क्रम एक बार फिर ताश के पत्तों की तरह तेज़ गेंदबाजी के तूफ़ान में ढह गया.
अगर इतिहास पर नज़र डाले तो भारतीय टीम पिछले दौरे पर इससे कही अधिक सफल हुई थी जब उन्होंने टेस्ट सीरीज को १-१ से बराबर किया था एवं एक दिवसीय क्रिकेट में ३-२ से सीरीज गवाई थी. मगर अगर संपूर्ण इतिहास पर नज़र डाले तो भारत ने दक्षिण अफ्रीका को दक्षिण अफ्रीका में २७ में से सिर्फ ५ एक दिवसीय मैचो में पराजित किया है. जबकि ५ दिन के क्रिकेट में उसे १५ मैचो में सिर्फ २ बार सफलता हाथ लगी है.
सवाल ये उठता है कि अपनी सरजमीं पर प्रतिद्वंदी टीम को धूल चटा देने वाली इस टीम का प्रदर्शन विदेशी तेज़ पिचों पे इतना लचर क्यों है? क्यों भारत के धाकड़ बल्लेबाज़ उछाल लेती गेंदों पर आत्म-समर्पण कर देते है?
शायद इसका मूल कारण है BCCIकी तरफ से घरेलु क्रिकेट को लगातार नज़रंदाज़ किया जाना. काफी समय से इस विषय पर बात होती रही है परन्तु धन और IPL के मद में चूर BCCI के पदाधिकारी घरेलु क्रिकेट की बुनियाद में आवश्यक परिवर्तन करने को इच्छुक नहीं दीखते. सपाट पिचों पर खेलने के अभ्यस्त बल्लेबाज़ इन गेंदों से अपरिचित है जो सीने से ऊपर तक उछल जाती है.
तेज़ गेंदबाज़ होना तो जैसे भारतीय सरजमीं पर अभी भी एक गुनाह है. यही गेंदबाज़ अफ्रीका या ऑस्ट्रेलिया की पिचों पर जब तक लय बिठाते है तब तक सीरीज में हार मुह बाए खड़ी होती है. मगर हर शर्मनाक हार के बाद भी BCCI के कानो पर जैसे जू तक नहीं रेंगती है.फिलहाल भारत सीरीज २-० से गवा चूका है, और आज मात्र इज्ज़त बचने के लिए संघर्ष करता दिखेगा, हलाकि मौजूदा प्रदर्शन को देखते हुए, ऐसा कम ही होने की सम्भावना है.

-Archit Srivastava,

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About Satish Sharma

Satish Sharma is Editor, Hindi of Awaz Aapki. Writes in many News Papers & Magazines as Columnar, Analyst. Like to work as Citizen Journalist. Doing his bit of work in raising voice of unheard. Currently he is managing two shows of Awaz Live TV named Mashal and Manthan also.

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