न्यायपालिका का कोहिनूर

p1देश की सर्वोच्च अदालत ने कोयले घोटाले पर अपना निर्णय देते हुए 214 कोयले की खानों के आवंटन को रद्द कर दिया .कोर्ट के इस फैसले से सी. ए. जी. की उस रिपोर्ट के पुष्टि होती है जिस में कहा गया था कि सरकार द्वारा कोयले की खानों के आवंटन में गंभीर अनियमिताएं बरती गई हैं जिस से सरकारी खजाने को न्यूनतम 1.86 लाख करोड़ रूपये का नुकसान हुआ है .

 

यह फैसला श्री प्रशांत भूषण की उस जनहित याचिका पर दिया जो उन्होंने 2012 में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की थी .इस फैसले की रिपोर्टिग करते हुए मीडिया ने प्रशान्त भूषण की एक भूमिका को लगभग नकार सा दिया है . सी. ए. जी. की रिपोर्ट सामने आने पर उनकी राजनैतिक पार्टी आम आदमी पार्टी ने जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया था .उन्होंने पूर्व प्रधान मंत्री श्री मनमोहन सिंह और श्रीमती सोनिया गांधी के निवास पर भी प्रदर्शन किया था जिस में पार्टी के बहुत से कार्यकर्ताओं ने पुलिस के लाठी और डंडे खाए थे .

 

देश की आजादी के बाद से कोयले के कारोबार का राजनीति और अपराध से गठजोड़ रहा है .जिसमें कोयला खदानों में काम करने वाले मजदूरों का शोषण होता रहा है और पर्यावरण को गंभीर नुकसान उठाना पड़ा है .इस सब को रोकने के लिए श्रीमती इन्द्रा गांधी की सरकार ने सभी कोयला खदानों का राष्ट्रीयकरण कर दिया था .

 

नई आर्थिक नीतिओं और उदारीकरण की व्यवस्था में सरकार ने पुनः इन खानों को निजी हाथों में देना शुरू कर दिया . इस खदान आवंटन में किस तरह की लूट हो रही थी यह अंधा भी देख सकता था .जब इस लूट का उल्लेख सी. ए. जी. की रिपोर्ट में किया गया .तो सरकार बिलबिला गयी .

 

संसद में कहा गया कि सी. ए. जी. सरकार का अकाउंटेंट है .जमा घटा ठीक हुआ है या नहीं केवल यही देखना उसका काम है .सरकार की नीति और निर्णय पर सी ए जी अपनी रिपोर्ट नहीं दे सकता .सरकार की ओर श्री कपिल सिब्बल जी ने देश के सामने जीरो लॉस की थ्योरी पेश की गई जिसमें यह बतलाया गया की यह नुकसान केवल काल्पनिक है वास्तव में ऐसा कोई नुकसान हुआ ही नहीं है .वे अपने तर्को से देश को उल्लू बना रहे थे .

 

जब सुप्रीम कोर्ट ने श्री प्रशांत भूषण और श्री एम एल शर्मा की ओर से दाखिल पी आई एल पर सुनवाई शुरू कर दी .तो यू पी ए सरकार का कोर्ट से यही अनुरोध था की केवल हमारी सरकार के समय के खान आवंटन नहीं एन डी ए सरकार के समय हुए आवंटन भी इस जांच के दायरे में लाये जाएँ .जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया .

 

लोग कहते हैं कि जांच की अवधि में एन. डी. ए. सरकार के समय को इसलिए शामिल किया गया कि उन्हें पता था कि यह घोटाला तो एन. डी. के. समय ही शुरू हो गया था . मनमोहन जी की सरकार में तो घोटाला खुली लूट में बदल गया .उन्हें अनुमान था कि दोनों घटकों की सरकार उन दलों की राज्य सरकार के नेताओं के शामिल होने के कारण कोई भी दल इस घोटाले को सामने नहीं आने देगा . किन्तु यह देश का सौभाग्य था कि एक ओर सी. ए. जी. के अध्यक्ष श्री विनोद राय की विस्तृत रिपोर्ट थी तो दूसरी ओर श्री प्रशांत भूषण जैसा काबिल वकील था और सोने में सुहागा था न्यायाधीश की कुर्सी पर श्री लोढा का होना . कोर्ट का यह फैसला न्यायायिक इतिहास एक मील का पत्थर बन गया .किन्तु श्री प्रशांत भूषण को समाज और मीडिया ने वह सम्मान नहीं दिया जिसके वे इस केस के बाद हक़दार हैं .

 

प्रशांत भूषण ने जो लड़ाई अपनी पी आई एल के माध्यम से शुरू की थी उसे उन्होंने अंजाम तक पंहुचा दिया .अब कोर्ट के निर्णय को लागू करने का कार्य सरकार को करना है .बहुमत की मोदी सरकार बल देकर यह नहीं कह पा रही है कि कोर्ट के फैसले को लागू करवा देगी .जब कि फैसले को लागू करवाना उसकी जिम्मेदारी है .आने वाले छ महीने में खदानों को बंद करवाना है उनसे अवैध खनन के बदले २९५ रुपए प्रति टन के हिसाब से जुर्माना वसूलना है जिससे सरकार को लगभग १० हजार करोड़ रूपये की आय होगी

 

अदालत के फैसले से जिन कंपनियों को सर्वाधिक नुकसान पहुंचेगा, उनमे जिंदल स्टील एंड पॉवर लिमिटेड, जेपी समूह और हिंडल्को इंडस्ट्रीज, जो किकुमारमंगलम बिड़ला के आदित्य बिड़ला समूह का हिस्सा है. अब सरकार है और उसका तोता सी बी आई है जो कोर्ट के सामने यह फरियाद लेकर पंहुचा था कि कोयले घोटाले में श्री कुमार मंगलम बिरला का और श्री पी सी पारिख के नाम उसकी क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली जाय .कोर्ट ने लगभग फटकारते हुए उनसे पूछा कि आखिर इस मामले में उन्हें इतनी जल्दी क्यों है और सुनवाई के लिए अगली तारीख 13 अक्टूबर 2014 निश्चित कर दी है .

 

इस घोटाले में श्री प्रशांत भूषण के साथ पी आई एल लगाने वाले श्री एम एल शर्मा ,आजकल एक सवाल पूछ रहे हैं कि भारत सरकार की यह परम्परा रही है कि जब कोई कम्पनी न्यायालय द्वारा किसी अपराध की दोषी करार कर दी जाती है तो उसे सरकार द्वारा ब्लैक लिस्ट कर दिया जाता है अर्थात उसे सरकार की ओर कोई काम या ठेका नहीं दिया जाता .सरकार श्री शर्मा को यही नहीं बतला पा रही है कि वह किस तारीख तक इन कंपनियों को ब्लैक लिस्ट कर देगी .

 

न्यायालय ने अपने फैसले से यह तो बतला दिया है कि घोटाला हुआ .जब घोटाला हुआ है तो जरूरी है कि घोटालेबाजों की पहचान की जाय और मुकदमा चला कर उन्हें दण्डित किया जाय .इस पर सरकार का कहना है कि सी बी आई इस मामले की जांच कर रही है उसकी रिपोर्ट के अनुसार कार्यवाई की जायेगी .

 

सी बी आई जांच करेगी .फिर केस दायर करेगी .फिर सुनवाई होगी .फिर फैसला आएगा.यह काम कब तक पूरा करना है इसके लिए सी बी आई को कोई समय सीमा नहीं दी गई है .जिन लोगों के खिलाफ सी बी आई को जांच करनी होगा उन में सम्भावित हैं कोयला मंत्री दसारी नारयाण राव ,सांसद विजय दर्डा ,सांसद सुबोधकांत सहाय, सांसद श्री प्रकाश जायसवाल ,बीजेपी के श्री अजय संचेती .इन नेताओं के कोयलाखनन करने वाली निजी कंपनियों के प्रमोटरों और संचालकों के संबंधों और अपराध में संलिप्तता की जांच सी बी आई को करनी है . सी बी आई का रुख आपने देख लिया है कि वह किस तरह क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने को उतावली है .वह क्या जांच करेगी .

 

देश के गुलाबी अखबारों के घोषित कर दिया है कि इस फैसले से देश में आने वाले विदेशी निवेष पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा .इस फैसले के अमल में लाने से उद्योग जगत पर और देश की अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पडेगा इसकी भयावह तस्वीर वे देश और सरकार के सामने पेश कर कर हैं .सरकार है कि खामोश हो गई है .

 

श्री प्रशांत भूषण ने साबित किया है यदि आप को किसी का भ्रस्टाचार सताता है फिर चाहे वह सरकार ही क्यों न हो तो उस के खिलाफ जंग लड़ी और जीती जा सकती है .आज हमारे देश को हजारों प्रशांत भूषण जैसे लोग चाहिए .देश का दुर्भाग्य है कि हमारे पास एक ही है . श्री प्रशांत भूषण ने इस मामले में जिस तरह अपने व्यवसायिक कौशल और नैतिक बल का प्रदर्शन किया है .वह एक मिसाल है .हम उनके आभारी और ऋणी हैं .

अशोक उपाध्याय

http://en.wikipedia.org/wiki/Indian_coal_allocation_scam

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