अंध भक्ति लोकतंत्र के लिए घातक !

Don't be a blind follower of any political partyआज की परिस्थिती में देश मोटे तौर पर तीन गुटों में बिखर चूका है. वो तीन गुट है एक मोदीवादी, दुसरे अरविन्दवादी और तीसरे कांग्रेसवादी. जो लोग इन में किसी एक गुट का समर्थन करते है, वे पूर्ण रूप से उस गुट की बुराई को नज़र अंदाज़ भी कर रहे है. और मज़े की बात ये है की ये अंध भक्त खुद को अंध भक्त मानते ही नहीं, लेकिन बाकि के दो गुटों के लोगो को अंध भक्त समझते है.

आज की स्थिति में हम किसी भी पार्टी, नेता या फिर विचारधारा के अंध भक्त नहीं हो सकते. ये न केवल हमारे विश्वास के साथ धोका है, बल्कि उस पार्टी के लिए भी घातक है जिसमे लोग उस पार्टी की बुराई करने से डरते है. सफ़ेद को सफ़ेद और काले को काला कहने की हिम्मत होनी चाहिए. सच को सच और झूठ को झूठ कहने की हिम्मत होनी चाहिए. पार्टी को और पार्टी के नेतृत्व को ये एहसास दिलाना चाहिए की कहा पार्टी सही है और कहा पार्टी अपनी दिशा से भटक रही है. ये न केवल उस पार्टी और उसके कार्यकर्ताओ के लिए अच्छा है, बल्कि देश की राजनीति में कुछ सुधार हो सकेगा. कम से कम पार्टी के नेता अपनी मनमानी नहीं कर पाएंगे.

आज देश में पारदर्शिता की लड़ाई लड़ी जा रही है. पुरे देश की जनता जानती है की राजनीति में पारदर्शिता आ जाने से देश की बड़ी बड़ी समस्याओ का समाधान हो सकता है. इसी विषय में RTI के दायरे में पार्टियों को लाने की एक कोशिश CIC ने की. जितने लोगो से हमारी बात हुई है, चाहे वो बीजेपी के लोग हो या फिर कांग्रेस के, इन पार्टियों के कार्यकर्ता RTI की वकालत करते है, लेकिन किसी की भी हिम्मत नहीं होती अपनी पार्टी से ये पूछने की,  की “अगर दुसरे दल RTI में आने को तैयार है, तो हमे क्या दिक्कत है?” आज बीजेपी, कांग्रेस और AAP के कार्यकर्ताओ की स्थिति ऐसी हो गयी है की उनका नेतृत्व कुछ भी उटपटांग निर्णय ले ले या फिर बात बोल दे, सारे समर्थक बिना सोचे समझे ऐसी हरकतों की वकालत करने लग जाते है.

हम सभी पार्टियों का एक एक उदहारण ले सकते है. बीजेपी के कार्यकर्ता चाहते है की बीजेपी RTI के दायरे में आये, लेकिन बीजेपी के नेतृत्व से कोई मांग करने नहीं जाता. अभी कुछ दिन पहले मोदी की साधू यादव से मुलाकात हुई, बहुत लोगो को ये अच्छा नहीं लगा. लेकिन कोई मोदी की इस हरकत के खिलाफ बोलता हुआ नज़र नहीं आया. कांग्रेस का तो और भी बुरा हाल है. अगर सोनिया और राहुल गांधी दिन को रात कहेंगे तब भी कांग्रेस समर्थको में इसका विरोध करने की हिम्मत नहीं है. सबसे ज्यादा चाटूकारिता कांग्रेस में है. अगर आम आदमी पार्टी की बात की जाये तो पिछले दिनों अरविन्द केजरीवाल ने बटला हॉउस एनकाउंटर को फर्जी कह दिया. बहुत सारे कार्यकर्ताओ को आपत्ति होने लगी. लेकिन ऐसे बहुत कम लोग थे जिन्होंने इस पर आपत्ति जताई. लेकिन कम लोगो के आपत्ति के बावजूद अरविन्द केजरीवाल को बहार आकर स्पष्टीकरण देना पड़ा और अपने बयां में सुधारना करनी पड़ी.

एक और हकीकत ये है की बहुत कम समर्थको को पार्टी के संविधान का ज्ञान है, और शायद इसी वजह से नेता पार्टी में मनमानी कर रहे है. सभी पार्टीयो को ये प्रावधान करना चाहिए की जिसे संविधान का बुनियादी ज्ञान नहीं है, उसे पार्टी की सदस्यता नहीं मिलनी चाहिए. जरुरत पड़ने पर परीक्षा भी ली जा सकती है. इससे पार्टी में अनुशासन और कानून बना रहेगा. राजनैतिक दल इस देश के लोकतंत्र को जिन्दा रखने में खून का काम करते है. अगर खून गन्दा हो जाये तो कोई लोकतंत्र ज्यादा दिनों तक जीवीत नहीं रह सकता. इसी लिए सभी पार्टी के सभी समर्थको से देश हित में ये अपील है की वे अपनी पार्टी के अंधभक्त न बने. गलत को गलत और सही को सही कहने की हिम्मत करे. अगर कार्यकर्ता नेताओ पर लगाम नहीं लगायेंगे तो पार्टी और देश दोनों के लिए ये घातक है. एक भाजपाई अच्छा भाजपाई हो, एक कांग्रेसी अच्छा कांग्रेसी हो और अन्य पार्टी के लोग भी उस पार्टी के सच्चे कार्यकर्ता तब ही बन सकते है जब वो पार्टी की सच्चाई, अच्छाई, झूठ और बुराई को जान कर उस पर कड़ी नज़र रखे और समय समय पर पार्टी को सही दिशा में ले जाने के लिए काम करे…

किसी भी पार्टी या नेता की बातो में न आये, ठन्डे दिमाग से सोंचे की इन बातो के फायदे और नुक्सान क्या है. सोचने का काम केवल नेताओ का नहीं है, सही लोकतंत्र में नेताओ का काम सोचने का है ही नहीं, उनका सही काम कर्यकर्र्ताओ की सोच को अमल में लाना है. सभी पार्टी के समर्थको को ये देखना चाहिए की जो पार्टी या नेता बोल रहे है वो व्यवहारिक है या नहीं, इमानदारी से लागु की जा सकती है या नहीं और उसमे देश का हित है या नहीं… जिस दिन पार्टी के समर्थक अंध भक्ति छोड़ देंगे और सवाल करने लगेंगे, मुझे यकीन है की देश के नेता तुरंत सुधर जायेंगे….

लेखक के विचार निजी है, आवाज़ आपकी लेखक के विचारो से सहमत होने के लिए बाध्य नहीं है.

फोटो: http://dharmadaptation.blogspot.in/

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About Yogesh Mandhani

Businessman by Profession, Journalist by Passion. Began Social life with Janlokpal Agitation led by Anna Hazare, now working for a media which will work without any fear or favour. Report all the news and views which affects common man of this nation. Also if any hard evidence is available, I would like to write on any issue which is concealed by Mainstream Media for reasons what so ever. It gives immense satisfaction and pleasure working at Awaz Aap Ki.

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