असहमति असहनीय क्यों

एक खबर के अनुसार नेशनल बुक ट्रस्ट ने फैसला किया है कि वह अपनी पुस्तक “ चिल्ड्रन हू मेड ईट बिग “ में से मेघा पाटकर पर लिखे अध्याय को हटा लेगा .नेशनल बुक ट्रस्ट मानव संसाधन विकास मंत्रालय की सहायता और अनुदान से चलने वाला एक स्वत्रंत ट्रस्ट है जिसका अपना बोर्ड है.

खबर के अनुसार यह पुस्तक कई वर्ष पहले हिन्दी के अतिरिक्त अंग्रेजी, असमी, उड़िया, मलयालम ,पंजाबी और तमिल में भी प्रकाशित हुई थी .यह पुस्तक सुश्री थंग मणि ने लिखी थी .इस पुस्तक में उन बारह व्यक्तियों के बाल जीवन का वर्णन है जो बाद में महानायक बनें .इन महानायकों में रस्किन बोंड , श्री एम. एस. स्वामीनाथन ,सरोद वादक अमजद अली खान , शतरंज खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद इत्यादि शामिल हैं .यह पुस्तक देश के कई शिक्षा बोर्डों में कक्षा सात के पाठ्यक्रम में स्वीकृत है .

जून २००२ श्री वी. के. सक्सेना, अध्यक्ष ,नेशनल कौंसिल फॉर सिविल लिबर्टीज (NCCL)अहमदाबाद ने नेशनल बुक ट्रस्ट के अध्यक्ष को एक पत्र लिखा ,जिस में लिखा गया था की इस पुस्तक में से मेघा पाटकर पर लिखा गया अध्याय “ द बस स्टाप “ हटा लिया जाय . इसके लिए उन्होंने यह कारण दिया था कि सुश्री मेधा पाटकर की निष्ठा संदेहास्पद है और उन्हें विदेशों से धन प्राप्त होता है . जून २००२ में लिखे इस पत्र पर एन. बी. टी. ने लंबे समय तक कोई कार्यावाही नहीं की थी .

अब नई सरकार आने पर पुन जून २०१४ में श्री वी के सक्सेना ने नई मानव संसथान विकास मंत्री सुश्री स्मृति इरानी को इस विषय में पत्र लिखा .जिसे मंत्री महोदया ने आवश्यक कार्यवाही के लिए नेशनल बुक ट्रस्ट को भेज दिया .इस बार एन बी टी के ट्रस्ट ने एन. सी. सी. एल. के पत्र में दिए गए तथ्यों से सहमति जताते हुए यह निर्णय लिया कि मेघा पाटेकर पर लिखा अध्याय इस पुस्तक से हटा लिया जाएगा .

श्री सक्सेना ने एन. बी. टी. को लिखे कारणों में जो कारण लिखे हैं उनमें प्रमुख हैं कि मेघा पाटकर अपने आप को गरीबों का मसीहा कहती हैं किन्तु उनके आंदोलन को दस से अधिक देशों से धन प्राप्त होता है जो नहीं चाहते हैं कि देश में हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट बने .बांध बनें और देश का विकास हो . उन्होंने आरोप लगया है उनका यह आंदोलन देश विरोधी कार्यवाई में शामिल रहा है . उन्होंने अपनी ओर से ऐसी गतिविधियों के विज्ञापन समाचार पत्रों में छपवाए हैं और उनके विरुद्ध अद्लातों में मुकदमें भी दायर किये हैं .

आपको बतलाते चलें की श्री वी. के. सक्सेना जो एन. सी. सी. एल .नामक एन. जी. ओ के संस्थापक है वे गुजरात सरकार के प्रिय प्रोजेक्ट दोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन , के डायरेक्टर भी हैं .साथ ही वे अडानी ग्रुप ऑफ कम्पनीयों में भी कई कंपनियों के बोर्ड में डायरेक्टर हैं .

देश की अदालतों में नर्मदा बचाओ आंदोलन को लेकर जो भी मुकदमे दाखिल हुए .उसमें आंदोलनकारी कभी पराजित हुए हों ऐसा नहीं कहा जा सकता .विदेशी धन ,देश द्रोह का भी कोई आरोप उन पर प्रमाणित नहीं हुआ है .इसके विपरीत सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह जरूर कहा कि जब तक लोगों के पुनर्वास का काम पूरा नहीं हो जाता बाँध की ऊंचाई न बढाई जाय .

मोदी जी की सरकार ने सत्ता में आते ही जो काम सबसे पहले किया , वह था सरदार सरोवर बाँध की ऊंचाई बढ़ाना .सब जानते हैं कि बाँध की ऊँचाई बढने से सबसे अधिक पानी गुजराज के उद्योगों को मिलेगा .राजस्थान और गुजरात के लोगों को पीने के लिए पानी मिलेगा ऐसा तो वे भी नहीं मानते . सब जानते हैं कि बांध की यह ऊंचाई बढ़ने से मध्य प्रदेश में डूब का क्षेत्रफल बढ़ जाएगा .तीन बार मुख्य मंत्री बने मामा शिवराज सिंह ,ऐसे सिंह भी नहीं हैं कि दिल्ली पहुचे सेवक को यह कह सकें कि आपके उद्योगों को अधिक पानी देने के चक्कर में मेरे प्रदेश के गरीब आदिवासी लोग डूब के मरे जाते हैं .इसे रोकिए.

सुश्री स्मृति इरानी जब मानव संसाधन विकास मंत्री बनी थीं तो कुछ लोगों ने उनकी शैक्षणिक योग्यता को लेकर प्रश्न उठाये थे .जो उतरित या अनुतरित हो कर दब गए .किन्तु अब जो कार्य उन्होंने या उनकी सरकार ने किया है उस पर कोई सवाल नहीं कर रहा .शुश्री स्मृति इरानी को एक एन. जी. ओ. से पत्र प्राप्त हुआ .उनके मंत्रालय ने उस पत्र पर कोई जांच ही नहीं की .सीधे आवश्यक कार्यवाही के लिए एन. बी. टी. के डायरेक्टर के पास भेज दिया . यहाँ उलेखनीय है कि एन बी टी के बोर्ड में आधे से अधिक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी भरे हुए हैं .

एन बी टी के डायरेक्टर और उसके बोर्ड को १२ साल तक समझ नहीं आया कि उनकी प्रकाशित पुस्तक ऐसा अध्याय छपा है जो नहीं होना चाहिए था .यह उनको तभी समझ आया जब नई सरकार आ गयी .तो ऐसे बोर्ड और संपादक मंडल पर गलत अध्याय स्वीकृत करने और उसे बनाये रखने के लिए कार्यवाई क्यों नहीं होनी चाहिए . ट्रस्ट अपनी इस करवाई से इतना बौरा गया है कि कह रहा है कि मेघा पाटकर का अध्याय इसलिए हटाया जा रहा है क्योंकि उन्होंने आप पार्टी की सदस्यता ले ली है .वे ऐसे राजनीतिक लोगों को वे अपनी पुस्तकों में शामिल नहीं करते हैं .फिर कोई उनसे पूछे कि उन्होंने इंदिरा गांधी ,जवाहरलाल नेहरू ,अटल बिहारी वाजपेयी पर पुस्तकें क्यों प्रकाशित की हैं और उन पर अध्याय क्यों हैं ?

एन. बी. टी. और सरकार के इस रवैये पर टी वी ,समाचार पत्र और शोशल मीडया न जाने क्यों खामोश है .जब कि नई सरकार की शिक्षा मंत्री ने अपने सौ दिन के उदघोष में स्पष्ट कर दिया है कि वे एन. सी. आर. टी. और दूसरी पाठ्य पुस्तकों को नए आलोक में देखना और लिखना चाहती हैं .सरकार की ओर से भी उनको सहमति प्राप्त है . तो पहला काम यह हो गया है .

आज आप एन. बी. टी .की बेब साईट पर जाईये और उनके केटेलॉग को देखिए .उसके अनुसार “ चिल्ड्रन हू मेड ईट बिग “ पुस्तक २०१४ में पहली बार प्रकाशित हो रही है और उसमें १६४ पृष्ठ हैं .जो अंग्रजी में है .जिस की लेखिका थंग मणि हैं और मूल्य ६० रूपये है .अर्थात ऐसी कोई पुस्तक जिस में मेघा पाटकर पर एक अध्याय था उसके द्वारा प्रकाशित ही नहीं हुई .

मूर्ख हैं वे लोग जो समझते हैं किसी का पाठ निकाल कर ,किसी पर सेंसर लगा कर किसी जेल में डाल कर या गोली मार कर उसे मार देंगे .क्या महात्मा गांधी को गोली मार देने से वे मर गए ?उन पर भी भी क्या क्या आरोप नहीं लगे थे .फिर लोकतंत्र में तो खेल ही पांच साल का है .यह दस का हो जाएगा .बीस का हो जाएगा .फिर जाना ही है .तो फिर इतिहास में अपनी मूर्खताएं क्यों दर्ज करवा रहे हो .असहमति के प्रति इतने असहिष्णु क्यों हो ? कोई जवाब देगा ?

अशोक उपाध्याय

सन्दर्भ

http://www.nbtindia.gov.in/catalogues__online-listingSearch.aspx

http://www.dailypioneer.com/nation/nbt-to-drop-chapter-on-patkar-after-ngo-plaint.html

http://www.hindustantimes.com/india-news/national-book-trust-drops-chapter-on-medha-patkar-from-book/article1-1265360.aspx

https://www.youtube.com/watch?v=Xbl4yMXJno0

http://www.in.com/videos/watchvideo-medha-patkar-pm-didnt-consult-involved-ministry-100344866.html#block1

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