अफसर का सम्मान

Devyani-Khobragade-अमरीका में भारतीय वाणिज्यिक दूतावास के अधिकारी देवयानी के अमरीका में गिरफ्तार होने पर बहुत बवाल हो रहा है. इस मामले पर अमरीका और भारत दोनों देश  आमने सामने आ गए हैं .

आसानी से समझें  तो मामला बिलकुल सीधा है. अमरीका के अनुसार भारतीय अधिकारी देवयानी अपनी घरेलू नौकरानी संगीता रिचर्ड को अमरीकी कानून के अनुसार न्यूनतम वेतन से कम वेतन दे रही थी .इसलिए उसे गिरफतार कर कोर्ट के सामने पेश किया गया .भारत के अनुसार देवयानी भारतीय दूतावास की अधिकारी है .उसे वियेना संधि के अनुसार उसे विशेषाधिकार प्राप्त हैं इसलिए उसे गिरफ्तार नहीं किया जाना चाहिए . अमरीका के अनुसार नौकरानी संगीता पीड़ित है तो दूसरी तरफ भारत के अनुसार अधिकारी देवयानी पीड़ित हैं .

भारत उन सामंत शाही देशों में से एक है जो राजनयिकों को अपने देश से नौकरों को भी साथ ले जाने  की सुविधा देता है .उनके साथ भारतीय कानून के अनुसार वेतन देने का करार करता है . इस पर राजनियकों का कहना है कि विदेशों में नौकरों के वेतन इतने ज्यादा हैं कि वे अपने घरेलू नौकरों को वेतन ही नहीं दे सकते . दूसरी ओर अमरीका के अनुसार, यह सीधे सीधे मानव तस्करी और शोषण का मामला है .

भारत के अनुसार उसके अधिकारी को दूतावास का अधिकारी होने के कारण विशेष संरक्षण मिला हुआ है अत उसे गिरफ्तार नहीं किया जाना चाहिए . अमरीका के अनुसार भारतीय अधिकारी वाणिज्यिक कार्यालय में काम कर रही थी वह दूतावास में काम नहीं कर रही थी . अत उसे  विशेष संरक्षण नहीं मिला हुआ था .इसलिए  अमरीका के कानून के अनुसार गिरफ्तार किया गया और गिरफ्तारी के समय ली जाने वाली तालाशी ली गयी .स भी काम अमरीका के कानून के अनुसार किए गए .

भारतीय अधिकारी की गिरफ्तारी के बाद उसे जमानत पर छोड़ दिया गया . भारत में इस गिरफ्तारी पर बवाल होने लगा .सभी भारतीय राजनैतिक दल इस गिरफ्तारी की निंदा करने लगे .कई भारतीय नेताओं ने अमरीका के प्रतिनिधि मंडलों से मिलने से इंकार कर दिया तो भारत को भय हुआ कि कहीं अमरीका उसे पुन गिरफ्तार न कर ले इसलिए उस अधिकारी का स्थानंतरण वाणिज्यिक कार्यलय से संयक्त राष्ट्र  के कार्यालय में कर दिया है .जहाँ के अधिकारियों को राजनैतिक संरक्षण प्राप्त है .इस स्थानंतरण पर अमरीका का कहना है कि यह अपराध ,संयुक्त राष्ट्र में स्थान्तरण की तिथि से पहले हुआ है अत इस मामले में सम्बंधित अधिकारी को विशेष संरक्षण प्राप्त नहीं है .

अब दोनों देश अपनी अपनी बात पर अड़े हैं .दोनों ही अपनी बात को कानून सम्मत बता रहे हैं .भारत में ज्यादा विरोध है .वह अपने को पीड़ित मानता है . अब भारतीय मीडिया ने इस मामले में अधिकारी के महिला होने से और भारत देश के सम्मान से भी जोड़ दिया है .

कानून और कानून के पालन की बात करें  तो दोनों देशों का इतिहास एक जैसा है .अपनी सुविधा के अनुसार कानून और उसकी व्याख्या बदल जाती है .जहां तक वियेना समझोते या राजनैतिक संरक्षण की बात है वह दूतावास के अधिकारियों को इसलिए दिया जाता है कि वे निर्भय हो कर दूसरे देश में अपना काम कर सकें .इस संधि पर हस्ताक्षर करने वाले सभी देश इस का सम्मान करते हैं .मगर यह संरक्षण अपराधिक मामलों के लिए नही होता है .

भारत और अमरीका में एक अंतर यह है कि जब भारत में कोई विदेशी राजनैयिक किसी भी अपराध में गिरफ्तार होता है तो भारत सरकार , तुरन्त मामले को रफादफा कर देती है और उसका समर्पण इस स्तर तक है कि राजनयिक द्वारा भारतीय नागरिक की हत्या तक के मामले में ,उस अधिकारी को ससम्मान उसके देश वापस जाने देती है . जब कि अमरीका ऐसे मामलों में अपना कानून का पालन करने  वाला चेहरा दिखलाता है और सम्बंधित राजनियक और उसके देश पर दबाव बनाता है और उसे अपमानित करता है .

विकासशील देशों के नागरिकों के प्रति अमरीका का यह सामान्य व्यवहार है वह भारत के राष्ट्पति के जूते उतरवाता है . रक्षा मंत्री की एयर पोर्ट पर जामा तालाशी लेता है . इन दो पदों से ज्यादा सम्मानित भारत में और क्या हो सकता है .मगर इतना विरोध नहीं होता .क्यों ?

भारत में चुनाव होने वाले हैं हर राजनैतिक दल को यह  दिखाना है कि वह अपने नागरिकों  के सम्मान का ध्यान रखते हैं .जनता को यह दिखाना है कि भारत एक शक्तिशाली देश है वह अमरीका से भी नही डरता . अपने नौकरशाह अफसरों को यह दिखाना है कि वो उनके साथ हैं .

अमरीका और राष्ट्रपति ओबामा इस समय कमजोर स्तिथि में हैं .इसलिए मामले को ठंडा करने के लिए उन्होंने खेद प्रकट कर दिया है . मगर उसका जो  कानून का पालन करने वाला रुख है उसे देखते हुए वह एक सीमा से ज्यादा नहीं झुकेगा .

एक और बात है अभी तक अमरीका ने , भारत के राष्ट्पति , रक्षामंत्री , राज्यों के मंत्रियों या भारत के  कलाकारों का ही अपमान किया था पहली बार किसी अफसर शाह पर हाथ रखा है .यह भारत की वह जमात है जो शासक है और स्थाई है . नेता और संसद सदस्य तो आते जाते रहते हैं .नेता भी इनके सिखाए और चलाए ही चलते हैं (अपवाद छोड़ दें) इन अधिकारिओं का अपना नेटवर्क है .भारत में तो इन पर कोई हाथ ही नहीं रख सकता . इन पर कोई केस दर्ज करने से पहले सरकार से  अनुमति लेनी पड़ती है .फिर सरकार में कौन है . इनके संगी साथी और उनके पोषक हैं राजनेता . इसलिए अधिकांश मामले तो दर्ज ही नहीं होते हैं. पुलिस, राजनेताओं , और उद्योगों के गठबंधन के कारण इनके भ्रस्टाचार के मामले जनता के सामने ही नहीं आते .

हम इस मामले को व्यक्तिगत नहीं बनाना चाहते , मगर तब भी यह सच है , इन्हीं देवयानी और उनके पिता , जो अब रिटायर्ड आई ए एस अधिकारी हैं . के शहीदों के परिवारों के लिए बनी आदर्श सोसाइटी में दो फ्लैट हैं . ये फैल्ट इन्होने कैसे खरीदे  .ये अभी तक नहीं बता पाए हैं .

हमारा यह कहना नहीं है कि सभी अधिकारी भ्रस्ट हैं . मगर इनकी जो शक्ति है .जो दबदबा है जो रुतबा है .उससे भारत में तो ये प्रभु वर्ग में आते हैं अमरीका ने उसकी रुतबे की परवा न कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया तो बिलबिला गए हैं .

इस मामले में नैतिक बल जैसी चीज तो न तो भारत के पास है और न ही वह अमरीका के पास है .उसने पहली बार उस वर्ग के अधिकारी को हाथ लगा दिया है जो भारत के  असली शासक  वर्ग का हिस्सा है और यह काम उसने गलत समय पर कर दिया है .बस इतनी सी बात है .

अशोक उपाध्याय

 

 

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