नदी से विकास

sab 2हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी देश के प्रत्येक क्षेत्र में विकास करना चाहते हैं .वे ऐसा विकास चाहते हैं जो दिखलाई दे और जिसे मापा जा सके .सकल घरेलू उत्पाद ( जी डी पी ) उसके लिए एक पैमाना है .उन्होंने नदियों को साफ़ करने का बीड़ा उठाया है जिस में गंगा नदी प्राथमिकता पर है .यदि गंगा जैसी है वैसी ही बहती रहे तो वह मृत नदी है .वह नदी देश की जी डी पी के विकास में कोई योगदान नहीं दे रही .वह अतिरिक्त योगदान दे इसके लिए जरूरी है कि उस पर कोई आर्थिक गतिविधि होती रहे .

पिछली सरकारों ने गंगा और यमुना की सफाई का अभियान चलाया था जिस में देश की सरकार के अलावा जापान की सरकार ,नीदरलैंड्स की सरकार और विश्व बैंक ने आर्थिक सहायता दी थी .उस पैसे से विशेषज्ञ आए .उनकी बैठकें हुईं ,उनकी रिपोर्टें बनी , ठेकेदारों को ठेके मिले .मजदूरों को काम मिला .सब को कुछ पैसा मिला .पैसे की इस गतिशीलता से देश की जी डी पी में कम सही , लेकिन वृद्धि हुई .इससे देश का विकास हुआ .यह प्रमाणित है .

नदी को न साफ़ होना था और न वह हुई .अपने और विदेशों से प्राप्त लाखों डालर खर्च कर के भी वह साफ़ क्यों न हुई उसमें क्या गलती हुई यह कोई जानना नहीं चाहता .किसी के द्वारा उस की कोई जांच नहीं की गई .क्यों ?.क्योंकि सब को पता है कि उस कार्य का वास्तविक लक्ष्य अर्थव्यवस्था को गतिशीलता देना था जिस में यह आर्थिक गतिविधि सफल हुई .

नदी को गन्दा होने से रोकना और नदी को साफ़ करना ये दो अगल अलग गतिविधि हैं यदि नदी को सौ प्रतिशत गन्दा होने से रोक दिया जाय तो वह अपने आप ही साफ़ हो जायेगी .सभी सरकारें नदी को साफ़ करना चाहती हैं .उसकी प्राथमिकता उसे साफ़ करने पर है . अर्थात नदी को गंदी करने वाले उसे गन्दा करते रहें और दूसरी ओर ये सफाई करते रहें .जिस से यह सफाई सफाई का कार्य हमेशा चलता रहे .इस से यह आर्थिक गतिविधि हमेशा होती रहेगी इसी से अर्थव्यवस्था ( जी डी पी ) में विकास होगा .

नदी को लेकर सामान्य जन और सरकार की अवधारणा में अंतर है .सामन्य जन उसे जीवन दायनी मानता है जिसका जल वह पीता है .जिस में वह स्नान करता है अपने आराध्य को समर्पित सामग्री उसमें प्रवाहित करता है और उसी में अपने पित्ररों का तर्पण करता है इस से अधिक नदी से उसे कुछ नहीं चाहिए . दूसरी ओर सरकार है जिस के लिए नदी एक संसाधन है जिस का उपभोग , संरक्षण और विकास उसने अपना काम मान लिया है .

 

सुप्रीम कोर्ट से कई बार डांट खाने के बाद गंगा सफाई की जो योजना कोर्ट को दी गई है .उसके लिए सरकार के पास बजट तो है लेकिन उस योजना को लागू करने के लिए चरणबद्ध और समयबद्ध योजना नहीं है .यदि है तो सरकार उसे जनता के साथ साझा नहीं कर रही है .क्योंकि जैसे ही योजना जनता के साथ साझा की जायेगी दोनों के अलग अलग सरोकार सतह पर दिखाई देने लगेंगे .

सरकार अपने नागरिकों से यह कहती तो कहती है कि नागरिक अपने पूजा के फूल नदी में तिरोहित न करें .नागरिक उसके किनारे शौच न करें .किन्तु यह नहीं बतलाती कि नदियों में जो मल मूत्र ले जाने वाले नाले गिर रहे हैं उन्हें किस तारीख को बंद कर दिया जाएगा ? इस से भी आगे बढ़ कर यह पूछ लिया जाय कि कारखानों ने निकलने वाले जहरीले रसायनों को नालों और नदियों में गिरने से रोकने के लिए उसके पास क्या योजना है ? उन्हें कब तक बंद कर दिया जाएगा ?

सच यह है कि सरकार के पास इस कार्य की कोई योजना नहीं है यदि योजना है तो वह कागजों पर है .क्योंकि यदि उस योजना को लागू किया गया तो उद्योगपति को वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाना पड़ेगा जिस से उसकी लागत बढ़ेगी . यदि इन नियमों को सख्ती से लागू किया गया तो हो सकता है कि कुछ ऐसे उधोगों को बंद करना पड़े जो जमीन और जल में जहर घोलते हैं .नदी की सफाई के लिए उद्योग बंद हों , रोजगार न रहें , उद्योगपति को नुकसान हो , आर्थिक गतिविधि रुक जाय .ऐसा यह सरकार करेगी ? शायद नहीं करेगी .

नदी के विकास का सरकार के पास क्या मॉडल है यह तो किसी को मालूम नहीं है .शायद कोई जानना भी नहीं चाहता .इसलिए कोई प्रश्न नहीं पूछता . स्वयं मोदी जी अपने भाषणों में , अपनी ओर से साबरमती नदी का उदहारण देते हैं और बतलाते हैं कि उनके प्रदेश में साबरमती नदी सूख गई थी उनकी सरकार ने उसे फिर जीवंत बना दिया है . सब जानते हैं कि उनका यह दावा झूठा है. अर्ध सत्य है मगर कोई नागरिक इस पर सवाल नहीं करता है .

अहमदाबाद में , ऐलिस ब्रिज से नीचे आप जो मनोहारी साबरमती नदी देखते हैं .जो विशाल नहर जैसी लगती है .जिस के दोनों किनारे सीमेंट के बने हैं .जिस में गहरा गंभीर पानी बहता है .जिस में तीव्र गति से चलने वाली मोटर बोट चलती हैं जिस के किनारे पर अमुज्मेंट पार्क है . बड़े बड़े होलोजन लैम्प लगे हैं .नदी किनारे सैर करने के लिए सीमेंट के ट्रेक बने हैं .व्यवस्थित बाजार है .लघु शंका के लिए शुलभ शौचालय है .

सब कुछ इतना भव्य है कि जब चीन के राष्ट्रपति अहमदाबाद आते हैं तो उनका स्वागत वहीं साबरमती नदी किनारे किया जाता है वहीं उनका झूला लगाया जाता है जिस में दोनों मिल कर झूलते हैं .जो आप इस नदी में नहीं कर सकते वह यह है कि आप किनारे से इसके जल का आचमन नहीं कर सकते .इसके जल में खड़े हो कर उगते सूरज को अर्ध्य नहीं दे सकते .नदी में खड़े हो कर स्नान नहीं कर सकते ( सीमेंट के किनारे वाली गहरी नदी है डूब कर जान जा सकती है )

इससे बड़ी बात यह है कि जिस साबरमती को जीवित करने की बात की जा रही है जिस का मनोहारी दृश्य अहमदाबाद के नागरिक और चीन के राष्ट्रपति ऐलिस ब्रिज से देख रहे हैं वह साबरमती नदी है ही नहीं .साबरमती नदी तो अहमदाबाद शहर शुरू होने से पहले ही बैराज पर ही सूख जाती है .फिर वह नदी साफ़ सुथरी बहती हुई दिखलाई दे इसलिए इस में नर्मदा नदी से आने वाली एक नहर का साफ़ पानी डाल दिया जाता है .ऐलिस ब्रिज पर बने रिवर फ्रंट पर कथित साबरमती साफ़ सुथरी गहरी लगे इसलिए उसमें शहर समाप्त होने तक कोई नाला नहीं मिलने दिया जाता .अहमदाबाद के नागरिकों को पुरानी साबरमती नदी नहीं ,पिकनिक के लिए एक शानदार रिवर फ्रंट मिल गया है जो इतना भव्य है कि आए दिन उस पर टी वी सीरयल और फिल्मों की शूटिग होती रहती हैं .

साबरमती नदी पर बने ऐसे रिवर फ्रंट पर जिस में हाई स्पीड मोटर बोट चलती हो .अमुज्मेंट पार्क हो ,शानदार बागीचा हो , रंग बिरंगी लाइटें लगी हों ,जोगिंग ट्रेक बने हों ,किस की भक्ति भावन जागेगी और कौन उसे माँ कहेगा .सो सरकार ने अपनी तरफ से हर महीने बनारस की गंगा आरती की तर्ज पर संध्या आरती का कार्यक्रम शुरू किया है जिस का प्रारम्भ श्रीमती आनन्दी बेन पटेल ने मुख्य मंत्री बनने के बाद किया है .

गंगा की सफाई का कोई अधिकारिक प्लान अभी तक सामने नहीं आया है .बनारस मोदी जी का चुनाव क्षेत्र था अत उसे ले कर थोड़ी बहुत योजनाएं सामने आ रही हैं वे ये हैं कि गंगा किनारे जाने के लिए पक्की चौड़ी सडकें बनाई जायेगीं .गंगा किनारे एक ऑडिटोरियम बनाया जाएगा जिसमें कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे . एक विश्वस्तरीय मयूजियम बनाया जाएगा जिस में गंगा का विस्तृत आख्यान होगा .कुछ घाटों को जीर्णोद्धार किया जाएगा .

यदि आप मोदी जी और साध्वी उमा भारती के दावों से सहमत हैं कि वे नदियों का पानी इतना स्वच्छ बना देंगे कि आप उस का आचमन कर सकें अर्थात उसे सीधे पी सकें .तो ऐसे में आपको सोचना चाहिए कि उस स्तिथि में अरबों रूपये के बोतल बंद पानी के व्यपार और पानी साफ़ करने वाली मशीनें बानाने वाली ,उसे बेचने वाली कंपनियों के व्यपार का क्या होगा .क्या वह बंद हो जाएगा ? अब वह कभी बंद नहीं होगा. कोई उसे बंद नहीं होने देगा .लोग कहेंगे ऐसा करने से कारखाने बंद हो जायेंगे ,लोग बेरोजगार हो जायेंगे ,पूंजी निवेश रुक जाएगा . ऐसा करने से देश की विकास दर गिर जायेगी

 

सरकार की इन नदियों की सफाई योजनाओं से आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगीं अर्थव्यवस्था में गतिशीलता आयेगी गंगा या अन्य नदियों की सफाई में लगे लोगों को रोजगार मिलेगा .उनका जीवन स्तर सुधरेगा .जी. डी. पी. बढेगी .देश का विकास होगा .मगर इस से गंगा की सफाई कैसे होगी यह सवाल अनुतरित ही है .शायद यह मुख्य लक्ष्य है भी नहीं .मुख्य लक्ष्य है विकास .जिस के लिए सब समर्पण भाव से समर्पित हैं .

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