काला धन बनाम विदेशी निवेश

black 2काले धन और विदेशी निवेश को लेकर कोई समझदार व्यक्ति भरतीय नेताओं, अर्थशास्त्रियों और पत्रकारों की की बात सुनेगा तो फैसला ही नहीं कर पायेगा कि यह व्यक्ति स्वयं मूर्ख है या दूसरे को मूर्ख समझता है .

अब यह सर्वमान्य सत्य है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में चलायमान लगभग आधा धन काला है . हम सब के पास काला धन है या हमने उसे बनाने में मदद की है .जब हमने बाजार से तेल नमक साबुन खरीदा था तो क्या उसकी पक्की रसीद ली थी .अस्सी प्रतिशत मामलों में हम रसीद नहीं लेते हैं . इस खरीद पर जो एक्साइज और विक्रय कर बनाता है .वह अधिकाँश मामलों में सरकार के पास नहीं पहुँचता है .वह दुकानदार थोक विक्रेता या उत्पादक के पास से कहीं गायब हो जाता है किन्तु वह आप से तो वसूला गया है .जिस के पास वह धन है .वह कर चोरी का धन है .वह काला धन है .

नई अर्थव्यवस्था में यह काला धन लगभग स्वीकार्य हो गया है .जब आप मकान खरीदने जाते हैं बिल्डर आपको एक मकान के तीन रेट बतलाता है एक वह, जिस की वह रसीद देगा .दूसरा वह वह जिस पर वह आपका लोन स्वीकृत करवाएगा .तीसरा वह कुल रकम जो आपको बिल्डर को देनी है .यदि आप वह राशि बिल्डर को नहीं देंगे जिस की वह रसीद नहीं देगा तो वह मकान आप को नहीं बेचा जाएगा .यह बिना रसीद के दिया गया धन , काला धन है .

इसी प्रकार, जब आप बच्चे के एडमीशन के लिए जो रकम देते हैं .डाक्टर को जो फीस देते हैं .अपना काम करवाने के लिए जो पैसा देते हैं , जिसे प्राप्तकर्ता अपनी आय में नहीं दिखलाता है . वह काला धन है . दुकानदारों ,व्यपारियों ,सरकारी अफसरों ,बड़ी कंपनियों के पास बहुत मात्र में काला धन होता है .इस काले धन को सरकार से छुपाने के लिए वे अपने या किसी दूसरे के नाम से जमीन, मकान, जेवरात खरीदते हैं .नई गाडियां खरीदते हैं देश विदेश में सैर सपाटे करते हैं वे ऐसे धन को अचल सम्पति में खर्च करते हैं जिसे जरुरत के समय बेच कर दोबारा नकदी प्राप्त की जा सके .

भारत में अब एक सीमा तक भ्रस्टाचार को शिष्टाचार माना जाने लगा है .लोग कहने लगे हैं पैसा / रिश्वत ले रहा है तो क्या हुआ काम तो कर रहा है .रिश्वत लेने वाले को अब पकड़े जाने का भय कम है क्योंकि सिस्टम चलाने वाले ही भ्रस्टाचारी हो गए है .फिर अपवाद तो सभी जगह होते हैं .आयकर विभाग ,देश के चार्टेड अकाउंटेंट और बड़े पूंजीपति इस व्यवस्था को चलाए रखना चाहते हैं .

नीरा राडिया के टेप ,कोयला और टू जी घोटले और इन लोकसभा चुनावों से यह साबित हो चुका है यह तंत्र इतना शक्तिशाली है कि यही मंत्री और सरकार बनवा और गिरवा सकता है .कहने को कुछ भी कहें सरकार का कोई भी अंग इस काले धन रखने वाले को पकडना नहीं चाहता .पकड़ना क्या उसे पहचाना भी नहीं चाहता .पिछले दिनों सरकारी बैंकों ने लगभग दो लाख करोड़ रूपये के ऋण माफ कर दिये .सरकारी बैंक उन लोगों के नाम बतलाने को राजी नहीं है जिन के यह ऋण माफ किए गए .इस काम में तो कोई कानून या अंतर्राष्ट्रीय संधि बीच में नहीं आ रही .किन्तु सरकार यह नहीं करेगी .

माना कि यह धन काला है .जिस को रखना और जिस का होना एक अपराध है .किन्तु यह भी सच है आधे से अधिक अर्थव्यवस्था इसी से चल रही है .यह देश के कानून का उलंघन ही नहीं अपराधिक लूट है किन्तु जब सरकार के सभी अंग कार्यपालिका ,विधायिका और न्यायपालिका तक इस भ्रस्टाचार में शामिल हों या इस पर मौन हों तब इस पर ज्यादा कुछ नहीं किया जा सकता .

भाग दो

देश की नई सरकार को तीव्र विकास करना है .उसे फ्लाईओवर और सड़कें बनाने के लिए पूंजी चाहिए .यह मान लिया गया है कि उसके पास पूंजी नहीं है ,निजी कंपनियों और सरकार के अपने उद्यमों ने अपनी ऐसी साख डुबोई है कि अपने देश के लोग ही नई कंपनियों के आई. पी. ओ. या सरकार के बोंड में पैसा लगाना लाभकार नहीं मानते हैं . ( गुजरात सरकार के सरदार सरोवर योजना के बोंड में सरकार ने अध्यादेश लाकर बोंड की पूर्णता की अवधि और ब्याज की दर ही बदल दी थी )

विकास के लिए पूंजी का दूसरा उपाय है कि देश में जो काला धन है उसे विकास की धारा में लाया जाय .यह धन काला सही किन्तु यह बैंको के फिक्स डिपोजिट में ,किसी मकान के रूप में या जेवरात के रूप में देश में ही है इसे यदि पूंजी में बदलना है तो छापे मार कर बरामद करना होगा और कानून के अनुसार अवैध घोषित कर जब्त करना होगा .यह एक लंबी कानूनी प्रक्रिया है .एक अन्य उपाय यह है कि सरकार कर माफी योजना शुरू करे .अर्थात लोग अपने आप आपनी काली कमाई घोषित करें उस पर कर और जुर्माना भरें और बाकी आय अपने पास रख लें .यदि सरकार यह कार्य करती है तो इससे ईमानदार कर दाता का मनोबल गिरेगा .दूसरे आज के समय में यह जरूरी नहीं है कि यह योजना सफल ही हो जाय .क्योंकि सरकार की कर चोरी पकड़ने की मशीनरी उसे बरामद करने की मशीनरी इतनी भ्रस्ट हो चुकी है कि अब उसे डर ही नहीं है कि कभी वह पकड़ा भी जा सकता है और सुब्रत राय की तरह जेल भी जा सकता है.

भाग तीन

देश के विकास के लिए पूंजी लाने का एक उपाय यह भी है कि भारतीय लोगों ने अपनी काली कमाई जो विदशों में जमा की है उसे अपने देश में लाया जाय .अन्ना हजारे ,अरविन्द केजरीवाल ,बाबा रामदेव ,एस गुरुमूर्ति जैसे लोगों ने इस दिशा में पहल की थी .जनता के दबाव में यू पी ए और एन डी ए और अब मोदी सरकार को कहना पड़ रहा था कि हम विदेश से काला धन लेकर आयेंगे .

जब कि सच यह है कि यह काला धन अब अपने देश आने को मचल रहा है .इसका क्या कारण है इस पर कोई चर्चा नहीं कर रहा है .भारतीय प्रेस ,प्रिंट या इलोक्ट्रोनिक मीडया इस पर चर्चा करेगा ऐसी उम्मीद भी आपको नहीं करनी चाहिए .अमरीका और यूरोप में स्लो डाउन / मेल्ट डाउन के बाद वहाँ की सरकारें इस बेनामी काले धन पर सख्त हो गईं .अमरीका ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर स्विस बैंकों से अपने नागरिकों का करोडों डॉलर वापस पाया उस पर जुर्माना और कर वसूल किया .यही काम जर्मनी और फ्रांस की सरकार ने किया .काले धन की पहचान और मूल देश की वापसी को लेकर देशों ने आपस में सहयोग किया जिसमे यूनाइटेड नेशन ने भी मदद की .लेकिन हमारे राजनेता और सरकारें मौन रहीं .

 

आज कर चोरी के लिए स्वर्ग के रूप में जाने वाले देशों और उनके बैकों पर इतना अंतर्राष्ट्रीय दबाव है कि वे अपने खातेदारों को मेल भेज कर सूचित कर रहे हैं कि वे उनके बैकों में जमा राशि के स्रोत की जानकारी दें अथवा उसे वहाँ से अपनी रकम निकाल लें .यहां आप को बतलाते चलें कि ये बैंक जमा राशि पर ब्याज नहीं देते हैं बल्कि खाते में राशि रखने के लिए रकम चार्ज करते हैं . जिन भारतीयों का काला धन इन बैकों में जामा है अब उनके दिल में धुकधुकी है कि कहीं उनके ये बैंक या उन देशों की सरकार दबाव में आकर उनकी रकम जब्त न कर लें या उस रकम की जानकारी भारत सरकार को न दे दें .

भाग चार

सरकार चाहे एन. डी. ए. की हो या यू. पी. ए. की या नई मोदी सरकार ,सभी को लगभग पता है कि किस का कितना काला धन कहां जमा है .ये खोज जांच और एस. आई. टी. इसलिए बनाई गई हैं जिस से सभी काम सरकार कि योजना के अनुसार हो .कोई जांच एजेंसी या कोर्ट इस योजना में गडबड न कर दे .

सरकारों ने काले धन की जानकारी के प्राप्त करने के लिए जो अन्य देशों के समझोते किये हैं वे उसी दिन से प्रभावी होंगे .अर्थात १९४७ से अब तक जितनी रकम जमा हुई उसकी जानकारी नहीं दी जायेगी .बस पिछले एक दो साल में जितनी रकम जमा हुई उसी की जानकारी दी जायेगी .समझ नहीं आता यह संधि नाम छुपाने के लिए की गईं है या नाम जानने के लिए की गईं हैं .जब कि जर्मन सरकार बिना किसी शर्त के बस एक पत्र के बदले सब कुछ बतलाने को तैयार थी .

 

अभी मोदी सरकार पर केवल विदेशों में काला धन रखने वाले लोगों के नाम बतलाने के लिए दबाब है तो वह यू. पी. ए. सरकार की भांति विदेशी संधियों की बात कर रही है .सुप्रीम कोर्ट से पूछ रही है कि आप बतलाओ कि क्या हम काला धन रखने वालों के नाम बतला सकते हैं या नहीं .जैसे सब कुछ सुप्रीम कोर्ट से पूछ कर ही करते हों .इस से अनुमान लगया जा सकता है कि जब कोर्ट में काला धन प्रमाणित करने और उसे जब्त करने की बात होगी तो सरकार की क्या दशा होगी .

भाग पांच

यू. पी. ए. और मोदी सरकार की सबसे पहली प्राथमिकता यह यह है कि उसे विकास करना है और उसे विकास के लिए पूंजी चाहिए .यह पूंजी उसे विदेश से चाहिए .उसी पूंजी के लिए मनमोहन सिंह जी और अब मोदी जी विदेश जा कर लोगों को बुला रहे हैं . ध्यान दें वे विदेशी सरकारों की बजाय भारतीय मूल के लोगों से पूंजी मांग रहे हैं .अपने देशों में उन के लिए एन. आर. आई. उत्सव आयोजित कर रहे हैं .उन लोगों को चीन कि मुकाबले भारत के लोकतंत्र ( प्रकारांतर से भारत के लचर न्याय व्यवस्था )और सस्ते श्रम की बात बतला रहे हैं .उनको लाभ की गारंटी दे रहे हैं .

भारत में पूंजी लगाने वाले ये एन. आर. आई. सरकार से अधिकतम छूट ले लेना चाहते हैं .सरकार पलट कर यह नहीं पूछ रही कि आप जो हमारे देश में पैसा ला रहे हो , उस में आपको यह घोषित करना होगा कि यह आप की वैधिनिक रूप से की गई कमाई है और उस पर आपने सम्बन्धित सरकार को कर अदा कर दिया है .

सरकार ऐसा क्यों नहीं पूछ रही ? क्या हम आई. एस. आई. एस . हथियारों के व्यपारी , नशीली दवाओं , मानव दासता और तस्करी और कर चोरी से कमाए धन को पूंजी के रूप में अपने देश में आने देंगे ?

सरकार की ओर उत्तर है. हाँ . रोज सवेरे देश के स्टॉक एक्सचेंज में करोड़ों रूपये का धन प्रोम्सरी नोट के माध्यम से लगता है .पता ही नहीं लगता कि उस पैसे का वास्तिक मालिक कौन है लेकिन वह शाम साढ़े तीन बजे तक करोडों कम कर खेल से बाहर हो चुका होता है .आज यह बेनामी काला पैसा ही देश चला रहा है .

भाग छ

देश में काले धन के बारे में अरविन्द केजरीवाल ने और उसके बाद बाबा रामदेव ने कुछ ऐसी हवा बना दी कि ईमानदार सरकार बनने पर विदेश से intanaइतना धन लाया जा सकता है कि दस सालों तक किसी तरह का कर लगाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी .हर गाँव में बिजली पानी और अस्पताल होगा और हम भारतीय की जेब में इस इस राशि में से १५ लाख रूपये आ जायेंगे .बी. जे. पी. ने लोक सभा चुनाव में इस मुद्दे को उठाया और लोगों की भावना जगा कर सपने दिखाए कि काला धन आने पर उन्हें लाखों रूपये मिलेंगे .

पिछले सप्ताह तो हद हो गई मेरा प्रिय एंकर टी वी पर बहस के समय विभिन्न पार्टी के नेताओं से पूछ रहा था कि आप बतलाओ कि अगर काला धन आता है तो मेरे हिस्से के तीन लाख मुझे मिलेंगे या नहीं . इसका क्या जवाब हो ?

आम आदमी को कुछ नहीं मिलेगा .वास्तव में जो विदेशों में जमा काला धन है .वही विदेश से आने वाली एफ. डी. आई. है .वही धन है .वही काला धन है .अगर आप भारत में एफ. डी. आ.ई और दूसरे स्रोतों से आने वाले धन को पहचान सकते हैं तो काला धन रखने वाले लोगों को भी पहचान सकते हैं .बस लिफाफे का अंतर है .

एक लंबी भाग दौड के बाद जिस काले धन की पहचान होगी सरकार सरकार उस पर कर और जुर्माना लगा कर छोड़ देगी .अपुष्ट खबर यह है कि सरकार ने यह काम शुरू कर भी दिया है .अगर आप सोचते है हैं कि काला धन कमाने और उसे गैर कानूनी रूप से विदेश में रखने के कारण वह जेल भी जाएगा तो आप को पता ही नहीं कि यह देश कैसे चलता है और इसे कौन चलाता है .

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