एक नयी शुरुआत

arvind

दिल्ली में आम आदमी की विजय इतनी बड़ी है कि उसे अभी पूरे रूप में कोई नहीं देख पा रहा है .सब अन्धों के हाथी की तरह अपनी अपनी तरह से देख रहे हैं . कुछ कहते थे दो सीट नहीं जीत सकते .बिना पैसे के चुनाव नहीं जीत सकते .सिद्धांतों पर राजनीति नहीं हो सकती .आज वे सब लोग कहां हैं ?

मगर अब क्या होगा यह भविष्य के गर्भ में छिपा है .सन 1947 के बाद जय प्रकाश नारायण जी के आंदोलन के समय , जब उन्होंने ने राम लीला मैदान से कहा कि पुलिस और सेना , सरकार के गैर वाजिब आदेश न माने तो उसी शाम देश पर इमरजंसी लाद दी गयी .जन आंदोलन तो उसी बक्त खत्म हो गया था .इमरजंसी के बाद जो जनता पार्टी की सरकार बनी .वह सत्ता लोलुप लोगों का समूह था जो निहित स्वार्थ के लिए एकत्रित हुए थे.इसलिए जल्द ही उन की कलाई खुल गयी और एक जन आंदोलन अपनी मौत खुद मर गया .

एक और बड़ा ,जन आंदोलन चीन में  शुरू हुआ .हजारों लोग चीन के थाई मन चौक पर इक्कठे हुए .इससे पहले की आंदोलन एक रूप और दिशा ले .चीन की सरकार ने सारे अंतरास्ट्रीय दबाव को दरकिनार कर अपने नागरिकों पर ही गोली चलवा दी और उन पर टैंक चढवा दिए . वह आंदोलन भी वहीं मर गया .

एक और आंदोलन मिस्र में हुआ .एक हद तक सफल भी हुआ .तहरीर चौक से एक उम्मीद जगी कि इस आंदोलन के बाद अरब जगत का नक्शा बदल जाएगा . मगर आज मिस्र में जतनी अस्थिरता है उसे देख कर लगता है कि इस से तो पहले ही अच्छा था .

इधर अमरीका में भी पिछले कई सालों से “औकुपाई वाल स्ट्रीट “ आंदोलन चल रहा है .पूंजीवाद के खिलाफ ,अमरीका के आम लोगों की आवाज इस आंदोलन में सुनी जा सकती है .दो वर्ष पहले यह अपने चरम पर था. अमरीका सरकार के दमन और मीडिया के ब्लैक आउट के कारण इसकी आवाज इतनी नहीं सुनी जा रही .मगर शोशल मीडिया और जनमानस में यह आंदोलन आज भी गतिशील है लेकिन किसी परिणिति पर नहीं पंहुचा है.

ऐसे में भारत में एक जनांदोलन का राजनैतिक पार्टी में परिवर्तित होना और विजय प्राप्त कारण एक बहुत बड़ी घटना है .देश का दुर्भाग्य है अन्ना ने पार्टी के लिए उस वक्त एक शब्द भी  नहीं कहा जब उस की सबसे ज्यादा जरूरत थी . यदि वे समर्थन न भी देते केवल आशीर्वाद वचन कहते जो आज कह रहे हैं तो आज दिल्ली की तस्वीर दूसरी होती और उन्हें फिर जन लोकपाल के आमरण अनशन के लिए नहीं बैठना पड़ता .

दिल्ली में एक सरकार बनते ही ,राज्यों की भ्रस्ट सरकारों की चूलें हिल जाती .पूरे देश का जन जन जाग उठता और उसे विश्वास हो जाता कि वह एक ही झटके में सरकार गिरा और बना सकता है .

बिगड़ा अब भी कुछ नहीं हैं .मगर अब समय लगेगा . देश के पास अनन्त समय होता है .हमारा जीवन सीमित है इस लिए थोड़ी निराशा होती है .लेकिन यह विजय इतनी बढ़ी हैं कि दुनियां भर के लोगों में यह विश्वास तो आ गया है कि ऐसा हो सकता है .और वह आप पार्टी के साथ आपने कर दिखाया है .

अशोक उपाध्याय

 

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