सेना और सरकार

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जनरल वी के सिंह के नए विवाद ने सत्ता के असली चेहरे को सामने ला दिया है .उस निर्मम सत्ता के साथ कौन कौन हैं उनके चेहरे अपने आप ही सामने आ गए हैं .

जब तक जनरल वी. के. सिंह सेना में थे बी जे पी को प्यारे थे .सेना में हथियारों की कमी को सार्वजनिक कर रहे थे तब भी कोई शिकायत नहीं थी .जब वे अपनी उम्र के मामले को ले कर सर्वोच्च न्यायालय पहुँच गए थे तब भी कोई शिकायत नहीं थी . क्योंकि उनके इन कामों से यू पी ए सरकार मुश्किल में पड़ रही थी इसलिए वे उनके इन कामों से आनन्दित थी .पुरस्कार के रूप में बी जे पी ने उन्हें सांसद बनवा दिया और मंत्री भी बनवा दिया .

बी जे पी को शायद उम्मीद थी कि सत्ता में आते ही वे सत्ता के चरित्र का समझ जायेंगे .इसलिए जब उनकी सरकार यू पी ए सरकार द्वारा तैयार किए गए हलफनामे को सुप्रीम कोर्ट में ज्यों का त्यों कोर्ट में पेश कर देगी तो वे खामोश रहेंगे .सत्ता सुख भोगेंगे .देशप्रेम और सेवा की लंबी लंबी बातें करेंगे .मगर उन्होंने अपनी राय ट्वीटर पर पोस्ट कर अपनी नासमझी ( विवेक ) का परिचय दे दिया .

आगे बढ़ने से पहले हम उस घटना को बतला दें जो इस विवाद के केन्द्र में है .कुछ वर्ष पहले उतर पूर्व में सेना की एक टुकड़ी ने एक नागरिक के घर में लूट पाट की , उसे बंधक बनाया और हत्या की थी . यह घटना प्रकाश में आने पर सेना ने छानबीन की .और घटना को सत्य पाया गया और सेना द्वारा लूट का माल भी बरामद कर लिया गया . सेना ने इस पर कोर्ट ऑफ इन्क्वारी गठित की थी उसमें भी घटना को सत्य पाया गया और कुछ सैनिकों को सेना से बर्खास्त कर दिया गया . अभी यह मामला सर्वोच्च में लंबित है .

जब यह घटना घटित हुई थी तब जनरल वी के सिंह सेनाध्यक्ष थे और लूट की कार्यवाही करने वाले टुकड़ी के इन्चार्च दलबीर सिंह सुहाग थे उस समय जनरल सिंह ने इसी घटना को आधार बना कर दलबीर सिंह सुहाग के प्रमोशन पर रोक लगा दी थी .

यू पी ए सरकार ने जाते जाते एक काम यह किया कि दलबीर सिंह सुहाग को सेना अध्यक्ष बना दिया .इस पर भी सब खामोश थे .बड़ी बात तब हुई जब नयी सरकार ने कोर्ट में यह हलफनामा दिया की जनरल वी के सिंह द्वारा की गयी कार्यवाही अनुचित और दुर्भावनापूर्ण थी .यह हलफनामा उस व्यक्ति के बारे में था जो उसी की वर्तमान सरकार में मंत्री भी है .

इस स्तिथि में लोगों ने कहा कि यह स्तिथि ठीक नहीं है कि केन्द्र सरकार में एक ऐसा व्यक्ति मंत्री बने जिस के खिलाफ सरकार खुद ही कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर रही हो कि वह दुर्भावना से कार्य कर रहा था .ऐसे में या तो केन्द्र सरकार उसे बर्खास्त करे या खुद ही जनरल सिंह स्तीफा दे दें .

इस मुद्दे पर रक्षा मंत्री श्री अरुण जेटली ने स्पष्ट कर दिया कि सरकार का यह दृढ मत है कि दलबीर सिंह सुहाग ही सेनाध्यक्ष बने रहेंगे.अरुण जेटली की इस घोषणा ने जनरल वी के सिंह को दबाव में ला दिया .उन्होंने चुप रहने की बजाय ट्वीटर पर अपनी राय ट्वीट की कि आज भी वे अपनी करवाई को सही मानते हैं .सेना में निरपराध नागरिकों को मारने वाले ,लूटने वाले सैनिकों पर कार्यवाही होनी चाहिए .अब दोनों ओर खामोशी है .वी के सिंह को लेकर सरकार की हालत सांप चछुन्दर सी हो गयी है जिसे न पकड़े जा रहा है और न छोडे जा रहा है .

देशभक्त पत्रकारों ने ,टी वी चेनलों ने मिल के घोषित कर दिया कि जनरल सिंह जो कर रहे हैं वह गलत है उन्हें अपनी बात ट्वीट नहीं करनी चाहिए थी .अब वे सरकार का अंग हैं .सरकार की सामूहिक जिम्मेदारी होती है उनका यह काम इस सिद्धांत के खिलाफ है .साथ ही उनका यह काम सरकार और सेना दोनों के खिलाफ है .इससे सेना का मनोबल गिरता है और सरकार की छिछलेदारी होती है .

मगर कोई यह नहीं बतलाता कि जनरल सिंह ने ऐसा क्या कह दिया है जिस से सेना के मनोबल पर विपरीत असर पड़ता है अगर सेना निरपराध लोगों को मारती है उनके घर लूटती तो उन पर कार्यवाही क्यों नहीं होनी चाहिए ?

यू पी ए की कांग्रेस सरकार ने जाते जाते दलबीर सिंह सुहाग को सेनाध्यक्ष बना कर यह बतला दिया कि सेना यदि लूट पाट या हत्या करती है तो यह उसका अधिकार है .सरकार के लिए यह मुद्दा नहीं है .एन डी ए की बी जे पी सरकार ने भी यह कह कर कि सेनाध्यक्ष के रूप में श्री दलबीर सिंह सुहाग की नियुक्ति अंतिम है इस पर मुहर लगा दी है कि सेना द्वारा निर्दोष लोगों को लूटा या मारा जाना उनके लिए भी कोई मुद्दा नहीं है .

इन मुद्दों पर गौरवमयी लोकतांत्रिक सरकार तब ध्यान देती है जब जम्मू कश्मीर में मुठभेड़ का सच सामने आ जाता है या नोर्थ ईस्ट में महिलाएं नग्न हो कर सरकार और सेना के खिलाफ सडकों पर प्रदर्शन करती हैं और वह तस्वीर अंतराष्ट्रीय मीडिया में छप जाती है . अपने नागरिकों के प्रति यू पी ए और एन डी ए दोनों दलों का रवैया एक जैसा ही है . क्या दुनिया के लोग हमारे लोकतंत्र के इस चेहरे को नहीं देख रहे हैं ?

ए उपाध्याय

 

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