श्री अरविन्द के सैंडल

 

 

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यह लेख महर्षि अरविन्द के बारे में नहीं है न उनकी चरण पादुकाओं के बारे में है यह श्री अरविन्द केजरीवाल के सैंडल के बारे में है जिनके बारे में अभी तक किसी ने ध्यान नहीं दिया है .तो हम ही घर के भेदी श्री विभीषण का काम करें .

अखबार और टी वी देख कर पता चला कि रेल भवन पर बैठ कर अरविन्द ने घोर अराजकता फैला दी है .स्थापित लोकतंत्र को खतरे में डाल दिया है. ऐसा उन्होंने क्या काम किया है वह टी वी पर आये विद्वान बता नहीं पाए हैं .हम उनको बतलाते हैं उन्होंने सैंडल पहन कर भी अराजकता फैला दी है .

सैंडल शब्द स्त्रीलिंग है .देखो उसने सैंडल पहने हैं .शब्द सैंडल से चित्र उभरता है एक स्त्री का .वो पुरुष हैं .फिर सैंडल क्यों पहने ? अराजकता फैला दी . सैंडल से कल्पना में आती है हील वाले सैंडल पहने चूड़ीदार पजामी पहने नवयुवती की या खुले बाल किए ,पेन्सिल हील वाले सैंडल पहने खट खट कर गुजर गयी हसीना की .ये कहां से आ गया . अराजक . क्यों पहने सैंडल ?

देश के नेताओं में महात्मा गांधी ने चमड़े की चप्पलें पहनी और आधे तन पर धोती बाँध ली .उसे ही पहने ब्रिटेन की संसद में भी हो आए .देश आजाद हो गया .नेताओं ने धोती और चप्पल दोनों छोड़ दीं .देश आजाद हो गया है .देश के नेता भी आजाद हो गए.

युवराज कलावती से मिलने सफ़ेद रंग के जो जूते पहन कर गए थे .उनकी अनुमानित कीमत केवल 140 डॉलर यानी लगभग 7000 रूपये है .आजकल भी वे ऐसे ही जूते पहनते हैं .विदेशी कम्पनियों के कारोबार को बढाने के लिए उन्हें ये जूते पहनने पड़ते हैं .वर्ना विदेशी निवेश रुक जाएगा . विदेश में गलत सन्देश जाएगा . और ये पहने हैं 300 रुपली के  सैंडल .देशद्रोही .विदेशी निवेश के दुश्मन . अराजक .

देश के कर्णधारों के श्री चरण देखने के लिए हमें बहुत से वीडिओ देखने पड़े क्योंकि कैमरा उनके श्री मुख से हटता ही नहीं . बहन मायावती जी सलवार सूट पहनती हैं सो उनके चरण दिख गये . वो चप्पल नहीं पहनती . काले रंग के चमकदार जूते पहनती हैं .अनुमानित कीमत सिर्फ 3000 रूपये .जय ललिता जी के सैंडल उनकी साड़ी के कारण नहीं दिखे .लेकिन लोग कहते हैं कि उनके और उनकी सहेली के पास अलमारी भर सैंडल हैं .बी जे पी की बहन स्मृति इरानी और सुषमा स्वराज की चप्पलें उनकी साडियों की तरह ही शानदार हैं .

अचरज की बात है राजनीति के सभी मर्द युवा नेता काले जूते ही पहने मिले और एक ने भी फीते वाले जूते नहीं पहने हुए थे .कारण भी जल्द ही समझ आ गया .सभी की तोंद इनती बाहर है कि वे झुक कर अपने फीते नहीं बांध सकते. उनकी राजनीति की तरह ही उनके जूते भी हैं. बस पैर फंसा दो .फिर जोर लगाओ .ऐडी से इधर उधर दबाओ .जूता पैर में फिट हो ही जाएगा .जूता न हुआ जनता हो गयी .

सोचो कि इन तोंद वाले लोगों को फीते वाले जूते पब्लिक में पहनने हों और बैठ कर जूते पहनने की सुविधा न हो तो क्या सीन होगा ? पिच्चर में जमीदार साहब को घोड़े पर चढ़ते देखा है ? एक आदमी घोड़े के पास जमीन पर उकडू बैठ जाता है और जमीदार साहब उसकी कमर पर पैर रख कर घोड़े पर चढ़ जाते हैं .यहाँ ये उसकी नंगी कमर पर पैर रख देंगें .बाँधने वाले फीते भी बाँध देंगें . समझदार हैं फीते वाले जूते नहीं पहनते .

अब यह अरविन्द सैंडल पहनता है .यह अराजकता है . सैंडल बाँधने  के लिए कमर को थोड़ा पीछे झुकाना पड़ता है सीना थोड़ा बाहर आता है और हाथ से फीते को ऐडी के एक तरफ से दूसरी तरफ ले जा कर बांधना या चिपकाना पड़ता है . सैंडल बाँधने में भी अरविन्द सीना बाहर निकलता है .आगे झुकने की बजाय पीछे झुकता है .यह अकड़ ही है .जो इस के व्यवहार में भरी हुई है . यह अराजकता है .

आपको यह लेख पढते हुए खीज हो रही हैं न . पिछले सप्ताह अरविन्द को अराजक बताने में अपने आप को लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ बताने वालों ने ऐसी ही और इसी स्तर की बहसें टी वी पर करवाई हैं .विद्वान् पत्रकारों ने ऐसे ही सम्पादकीय लिख दिए .हुआ हुआ करते हुए बहुत से लोग भी इनके साथ हो लिए . हम आशावादी  इनसे उम्मीद रख रहे हैं कि ये हमारे रहनुमा हैं .ये स्वराज और समाजवाद ले कर आयंगे .भूखों को खाना और सिर छुपाने को छत मिलेगी और सब को न्याय मिलेगा .

ऐसा हो नहीं सकता .चुनाव सिर पर हैं .भ्रष्ट व्यवस्था अपने आप को क्यों बदलने देगी ? क्यों ये अपने गले में खुद फंदा डालेगें ? क्यों नहीं टी वी पर ६० करोड़ वंचितों की ,कोर्टों में लंबित पड़े  २० करोड़ केसों और आकंठ भ्रस्टाचार में डूबी व्यवस्था की चर्चा होती ? इनमें से कोई व्यवस्था परिवर्तन नहीं चाहता है क्योकि जिस के लिए व्यवस्था परिवर्तन होना है उसकी आवाज इस व्यवस्था में नहीं है .वह बेजुबान जानवर जैसा है .

आप भावुक न हों .टी वी और मीडिया में इसी स्तर की बहस होंगीं .इन लोगों को बहस के लिए भी अगला टॉपिक हम ही दे देते हैं .अरविन्द आधे बाजू की बुशर्ट बाहर रख कर क्यों पहनते हैं . देश जानना चाहता है .क्या उनके पास कपड़ा कम है ? क्या उनका दर्जी चोर है ?क्या उनके पैंट की जिप ख़राब है ? इसी स्तर की रास्ट्रीय बहसें होंगीं .

अब इसका एक ही जवाब है आप उठ खड़े हों या पी कर सो जाएँ .फैसला आप ही को करना है .

अशोक उपाध्याय

 

 

 

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