मानसून आएगा

m17अभी सारा भारत गर्मी में झुलस रहा है .अगले महीने से सारे भारत में मानसून आ जाएगा .बारिश की पहली बूदों की तस्वीरें अख़बारों के मुखपृष्ठ पर छपेंगी .कुछ दिन बाद सडकों पर पानी भरने और ट्रेफिक जाम होने की खबरें आयेगीं .फिर कुछ ट्रेन कैंसिल होने की ,जनजीवन अस्तव्यस्त होने की ख़बरें आयेगीं

.फिर शहर के निचले हिस्सों में पानी भरने की खबरें आयेगीं .फिर उन लोगों को शहर के स्कूलों में शिफ्ट किया जाएगा .जहाँ आसपास के कालोनी के लोग इन बाढ़ पीड़ितों के बच्चों के लिए दूध और डबलरोटी ले कर जायेगें और देश के संगठित सेवी दल आलू की सब्जी और पूरी ले कर जायेंगे साथ में अपनी पार्टी के झंडे भी लेकर जायेगे जिस से उन की पहचान हो सके.

यह लेखक बुरी चीजों की कल्पना करने वाला कोई निराशावादी प्राणी नहीं है .लेकिन आप ही पिछले दशकों कोई ऐसा वर्ष बतला दें जब आप ने इस तरह के दृश्य न देखे हों .हम तो इससे आगे की भी बात करते हैं .एक पार्टी का नेता दूसरी पार्टी पर आरोप लगायेगा कि जिस ठेकेदार को नालियां साफ़ करने का ठेका दिया गया था उसका सम्बन्ध अमुक पार्टी से है और वह इस काम में इतना करोड रूपये खा गया .उसकी जांच की जाय. फिर कुछ दिन बाद नदियों का जल स्तर बढेगा .नदियों में बाढ़ आयेगी .डूबी हुई झोपड़ी और मंदिरों की फोटो छपेंगी .बड़े नेता इन बाढग्रस्त क्षेत्रों का दौरा करेंगे अपनी और से सहायता राशि देंगे और केन्द्र से और सहायता की मांग करेंगे .

केन्द्र में नई सरकार आई है .भगवान न करे ये दृश्य देखने पढ़े मगर हम जानते है हर वर्ष की भांति ये सब इस साल भी होगा .बाढ़ आना एक पहले प्रकृति का प्रकोप था .आज हम बाढ़ को आयोजित करते हैं .

शहरों में तालाबों को पाट कर उन पर कालोनियां खड़ी कर दी हैं .घर के कच्चे दालान को पक्का सीमेंट का बनवा दिया है .पार्को तक में सीमेंट और पत्थरों की पक्की सडकें हैं .सभी फुटपाथ सीमेंट के बने हैं .तो बारिश का पानी कहां जाएगा .जामीन में तो अब रिस कर नहीं जा सकता .वह धड धड़धड़ा हुआ नालिओं सडकों और नदियों में बाढ़ बन कर ही बहेगा .

गावों में भी कुएं नहीं रहे हैं .तालाबों के कैचमेंट के रास्ते बंद हो गए हैं .नदी किनारे की रेत , रेत माफियाओं ने लगातार खोद के बेच दी है .ऐसे में नदी में बाढ़ आना ही स्वाभाविक है .जिसे सब ने स्वाभाविक मान लिया है .

वास्तव में हमारे देश में जल प्रबंधन एक अरबों रुपयों का व्यवसाय है एक ओर पानी नहीं है ( पीने को भी पानी भी नहीं है ) दूसरी और बाढ़ है और हमारे देश के महान नेता हैं जो कभी नदियों के पानी के सड़कों पर लड़ते हैं तो कभी सुप्रीम कोर्ट पहुच जाते हैं .कभी उसकी अविरल धारा की बात करते हैं तो कभी उस पर बाँध बनाने की बात करते हैं .कभी उसे जीवन दायनी माँ बतलाते हैं तो कभी उसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की बात करते हैं .

इस सब में इनका हित है .देसी ही नहीं अब तो अंतर्राष्ट्रीय कंपनियां भी इस जल प्रबंधन के काम में लगी सब को अपने ठेके चाहिए .दिल्ली का सोनिया विहार जल संशोधन प्लांट विदेशी कम्पनी चलाती है .नदियों को जोड़ने की योजना में भी विदेशी आ गए है .अब समझ ही नहीं आ रहा है कि इन का काम जल प्रबंधन है या वाटर वे निर्माण ,जिस से आवागमन हो सके .

नई सरकार भी बड़े बड़े काम करने को उतावली है .उसने पटेल साहब की सबसे बड़ी प्रतिमा बनाई वहाँ मनोरंजन स्थल बना कर कमाई भी करेगी ,बुलेट ट्रेन चलवाएगी ,नदियों को जुड़वा देगी .सब बड़े बड़े काम जो बड़ी कम्पनी या प्राइवेट पब्लिक पार्टनर शिप में होंगें .

ऐसे में हम क्या कर सकते हैं .अभी मानसून आने में एक महीना है .यह जल प्रबंधन के लिए बहुत कम समय है तब भी हम एक काम अपने स्तर पर ,अपने छोटे समूह के स्तर पर कर सकते हैं वह है .रेन वाटर हार्वेस्टिग का . यह काम बहुत आसान है .आम अपने छत पर बरसने बाले पानी को भूमिगत टैंक में एकत्रित कर सकते हैं या अपने आंगन में बरसने वाली बारिश को जमीन के अंदर पंहुचा सकते हैं .

यह काम बहुत तकनीक का नहीं है और न ही यह बहुत खर्चीला है .कुछ हजार में ही ऐसा सिस्टम बन जाता है जिस से आपके घर के सामने पानी भी खड़ा नहीं होता और जरुरत के समय आप अपने टैंक से पानी निकाल सकते हैं .यदि आप सोसायटी में रहते हैं तब यह काम और भी आसान है .छत और मैदान का पानी आसानी से जामीन के अंदर चला जाता है जिससे कालोनी में बारिश का पानी खड़ा नहीं होता और आने वाले दिनों में मच्छर भी नहीं होते .

इस सम्बन्ध में दिल्ली के सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट ने बहुत विस्तृत कार्य किया है यह जानकारी उन्होंने अपनी वेब साईट पर डाल दी है उसका पता है

http://www.cseindia.org/taxonomy/term/20167/menu

http://www.rainwaterharvesting.org/

इस साईट पर उन्होंने रेन वाटर हार्वेस्टिंग के डिजाइन ,देश भर के पानी के आंकड़े और उन लोगों और संस्थओं के पते दिए हैं जिन्होंने अपने यहाँ ये सिस्टम लगाया है .ये जानकारी इतनी विस्तृत है यह काम करने वाले प्लम्बर और चिनाई मजदूरों के मोबाइल नंबर भी दिए हैं .आप अपने स्तर पर और जानकारी के एकत्रित कर यह काम कर सकें तो और भी अच्छा है .    मानसून से पहले सरकार यह काम करेगी ?

ए उपाध्याय

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