ऐसा न करना

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प्रिय मोदी जी , सब लोग उम्मीद करते हैं कि उम्मीदवार चुनाव जीतने के बाद अपने वायदों को पूरा करें . मगर मेरा अनुरोध है कि अपने वायदों पर दोबारा नजर डालना और उसी क्रम में पूरा करना जिस क्रम में उन्हें पूरा करना जरूरी हो .

चुनाव प्रचार के समय देश के सामने विकास का खांचा खींचते समय अन्य बातों के साथ आपने कहा था कि आप बम्बई से दिल्ली तक के लिए सुपर फास्ट बुलेट ट्रेन चलवाना चाहते हैं .जिससे बम्बई से दिल्ली तक की दूरी छ घंटे में ही पूरी हो जायेगी .यही काम आप प्राथमिकता पर न करना . हमें मालूम है जापान सरकार इस प्रोजेक्ट के लिए टेक्नोलोजी और चलाने के लिए देश को ऋण देने को तैयार बैठी है.

दिल्ली के लोगों को याद है विशेषज्ञों की बात को दर किनार कर रिलाइंस ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से दिल्ली एयर पोर्ट तक के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर मेट्रो ट्रेन शुरू करवाई थी .रिलाइंस को इस प्रोजेक्ट में उतना फायद नहीं हुआ जितना उसको उम्मीद थी तो उसने यह प्रोजेक्ट सरकार के गले डाल दिया .अब जहां मेट्रो की सभी लाइनें डी .आर .एम .सी .को फायदा दे रही हैं .वहीं मेट्रो इसे घाटा उठा कर ढो रही है .

आप ने ट्रेन में चाय बेची है .मुझे विश्वास है वे दृश्य जरूर देखें होगे .जब रात होते ही थ्री टायर के डिब्बे में लोग दोनों सीटों के बीच चादर बिछा कर सो जाते हैं . डिब्बे में गेट के पास .वाश वेशन से ट्रेन के दूसरे दरवाजे तक , जानवरों के रेवड़ की तरह लोग ठुंसे होते हैं और कुछ तो शौचालय तक में यात्रा करने को मजबूर होते हैं .

आपने प्लेटफार्म पर लोगों को टी .टी .की चिरौरी करते लोग देखे होंगे जो कातर भाव से उनकी तरफ देखते हैं है कि उन्हें ट्रेन में सीट मिल जाय .मगर उनके लिए ट्रेन में जगह नही होती .जिन के पास देने के लिए पैसे होते हैं उनका प्रबंध हो जाता है .

मेरा अनुरोध है कि आप स्वयं आई .आर .सी. टी .सी .की साईट से तत्काल टिकट बुक करवा कर देखें .टिकट नहीं मिलेगी . सवाल सोफ्टवेयर या एजेंटों का नहीं है . सवाल यह है कि ट्रेन ही छोटी है उसमें डिब्बे और सीटें नहीं हैं .देश को ज्यादा ट्रेंने और आम जनता के लिए ज्यादा सीटें चाहिएं .आप ही बतलायें कि क्या जिंदगी में सब कुछ इतना निश्चित है कि उसके लिए दो महीने पहले आरक्षण करवाया जा सकता है .

यदि कोई आकस्मिक घटना हो जाती है और आपके पास रेलवे टिकट नहीं है तो रेलवे को ही ज्यादा पैसे दो और टिकट लो और अगर रेलवे या एजेंट को देने के लिए पैसे नहीं हैं तो रेलवे की यह ट्रेन आपके लिए नहीं है .

इसे हलके में न लें .सरकारी रेल के प्रबंधक ऐसा ही सोचते हैं इसी लिए वेस्टर्न रेलवे ने दिल्ली से बम्बई के लिए “फ्लेक्सी फेयर “ स्कीम शुरू की है .जो हवाई जहाज के किराये की तर्ज पर टिकट की दाम वसूलती है . रेलवे इस किराये की स्कीम को अन्य ट्रेनों में भी शुरू करना चाहता है .तो इस तरह रेलवे और सरकार आदमी की जरूरत या कहिए मजबूरी के हिसाब से उससे किराया वसूलेगा. क्या आप इसे स्वीकार करेंगे .

क्या आपको पता है कि आप की रेल में आरक्षण भी है और कोटा भी है .राजधानी ट्रेन में वेटिंग की टिकट वाले उसमें चढ़ भी नहीं सकते .कोई बिना सीट वाला इधर उधर घूमेगा तो साहब लोगों को परेशानी हो जायेगी . नेताओं के लिए उनके सहायकों के लिए ,रेलवे के अपने लोगों के लिए और भी न जाने किन किन के लिए और न जाने कौन कौन से पास और कोटे हैं जिन से इन्हें टिकट मिलने में परेशानी नहीं होती है .( उन्हीं लोगों के लिए और पैसे वालों के लिए यह बुलेट ट्रेन भी होगी )

भारतीय ट्रेनों और उसके यात्रिओं की असली हालत देखनी हो तो ट्रेन के उस अनारक्षित डिब्बे को देखिये जो आधा इंजन के पीछे और आधा गार्ड के डिब्बे के जुड़ा होता है .उस डिब्बे में चाय बेचने वाले भी नहीं आते क्योंकि वह बाकी ट्रेन से जुड़ा नहीं होता .

प्रिय मोदी जी , जापान के कर्ज और उसी की उधार टेक्नोलॉजी से हो सकता है कि आप अपने वायदे के अनुसार दिल्ली से बम्बई तो ये बुलेट ट्रेन चला भी दें .इससे भारत भी उन विकसित देशों में आ जायेगा जहाँ बुलेट ट्रेन चलती हैं . कुछ के लिए इससे देश का विकास भी होगा और देश का गौरव् भी बढ़ेगा .मगर मैं आपका ध्यान , गुजरात के ही एक संत , जिन्हें देश राष्ट्रपिता कहता है ,उन्होंने कहा था कि व्यवस्था में कोई भी काम करने से पहले यह सोचना चाहिए कि इससे पंक्ति में खड़े आख़िरी आदमी का क्या हित होगा .

आज की स्तिथिओं में बुलेट ट्रेन की यह योजना उन करोड़ों देशवासियों को बुलेट की तरह लगेगी जिनके लिए अभी ट्रेन नहीं है और ट्रेन है तो उसमें आरक्षण नहीं है .मतलब वही कि ट्रेन नहीं है .

ए उपाध्याय

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