एक लात और मार दी

3जो लोग यह सोचते हैं कि हमारे निवर्तमान प्रधानमंत्री मासूम हैं और मौन रहते हैं और कुछ करते नहीं हैं .उन्हें प्रधानमंत्री जी के बारे में दोबारा सोचना चाहिए .वे दस साल तक निष्कंटक प्रधानमंत्री बने रहे .सब कुछ उनकी मौन या लिखित सहमति से होता रहा .मगर वे बे दाग हैं .है न कमाल .

3 जनवरी 2014 को जम्मू में साइंस कांग्रेस को संबोधित करते हुए प्रधान मंत्री जी ने खाद्य उत्पादन में नई तकनीक की बात की थी . 18 मार्च को देश के कृषी मंत्री श्री शरद पवार ने जी एम फ़ूड को बढावा देने के लिए बयान दिया और 20 मार्च को पर्यावरण मंत्री श्री वीरप्पा मोइली ने 10 जी एम फसलों को फील्ड ट्राइल करने की अनुमति दे दी .इन दस फसलों में चावल ,गेहूं , ज्वार ,बाजरा कपास इत्यादि फसलें शामिल हैं यह अनुमति केंद्र सरकार की जिनेटिक इंजीनियरिंग अप्रेजल कमिटी (जीईएसी) ने दी है.

आप को याद दिला दें यह वही अनुमति है जिस पर उस समय के पर्यावरण मंत्री श्री जयराम रमेश ने जनमत से सीधे सुनवाई की थी और इन परीक्षणों पर अनिश्चित काल के लिए रोक लगा दी थी जिस में बी टी बैगन भी एक था . जानकार लोग कहते हैं कि इसी मुद्दे पर श्री जयराम रमेश को अपना मंत्रालय छोडना पड़ा था .उसके बाद यह मंत्रालय शुश्री जयंती नटराजन को दिया गया जिनके बारे में यह माना जाता है कि वे सरकार की पूर्ण समर्थक हैं .उन्होंने भी अपने सेवा काल में इन परीक्षणों को अनुमति नहीं दी थी .अब कहने को यह अनुमति जी इ ऐ सी ने श्री मोइली की सहमति से दी है . लेकिन असली कर्ता धर्ता हमारे प्रधानमंत्री जी ही हैं .

हमारे देश में फील्ड ट्राइल में मानकों का पालन किस तरह किया जाता है . किस तरह आंकड़े रखे जाते हैं और बदल दिए जाते हैं .किस तरह उनके विशेषज्ञ एक विचार धारा के समर्थक बन जाते हैं और एक दिन बाद ही अपनी रिपोर्ट से असहमति दे देते हैं .यह हमने बार बार देखा है .

देश का दुर्भाग्य है कि अब हम इतने पिछड गए हैं कि विदेश की बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियों को कृषी के फील्ड ट्राइल और नई दवाओं के क्लनिक्ल ट्राइल के लिए अफ्रीका के साथ भारत भी नजर आता है .गरीबी की इस से बुरी मार क्या होगी .

श्री वीरप्पा मोइली ने जो सहमति दी है उसकी जिम्मेदारी भी वे लेने को तैयार नहीं हैं उन्होंने कहा है कि इन फील्ड ट्राइल पर अंतिम निर्णय राज्य सरकारों को लेना है .क्या निर्णय है . कुछ राज्यों में तो मोइली जी के दलों की ही सरकार है .तो क्यों नहीं सीना तान कर देश को बतलाने कि देश और किसानों के हित में हमारी सरकार ने जी फ़ूड के फील्ड ट्राइल की अनुमति दे दी है और देश के नागरिकों से अपनी इसी सफलता पर वोट मांगते .

इस चुनाव के माहौल में , जहाँ हर छोटी बड़ी बात पर गला फाड़ कर आरोप प्रत्यारोप लगाए जा रहे हैं सभी राजनैतिक दल इस फील्ड ट्राइल की अनुमति पर खामोश हैं इस से साफ़ होता है ये सभी राजनैतिक दल अपनी अपनी मूल अवधारणा और कार्य शैली में एक समान हैं .सभी को सत्ता में आना है और देश का माल और देश को लूटना है .

जी एम तकनीक से कितना उत्पादन बढ़ेगा , देश की जैव विविधता पर इस क्या परिणाम होंगे .पर्यावरण , पशु पक्षियों पर हमारे अपने डी एन ऐ पर लंबे समय में क्या प्रभाव पडेगा .अभी कुछ पता नहीं .अमरीका ने स्वयं अपने यहाँ जी एम फ़ूड पर रोक लगा रखी है .चीन सोयाबीन तक पर जी एम के प्रयोग नहीं करता है और हम ने चावल ,ज्वार ,बाजरा मक्का सब के लिए अनुमति दे दी .कितना महान देश है .

एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि इसी मुद्दे पर अप्रेल महीने में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है .देश में आदर्श चुनाव संहिता लागू हो चुकी है फिर सरकार को ऐसी क्या जल्दी है कि जाते जाते देश को एक लात और मार दी .वलील प्रशांत भूषण ने इसे न्यायालय की अवमानन बतलाया है .यह एक गंभीर मुद्दा है इसलिए यह जरूरी है कि हम खुद इस मुद्दे पर पढे और अपनी राय बनाएँ और सरकार को देश हित में काम करने को प्रेरित या मजबूर करें

समाचार के लिए लिक है .

http://timesofindia.indiatimes.com/india/Govt-regulator-paves-way-for-field-trials-of-GM-food-crops-including-wheat-rice-and-maize/articleshow/32436421.cms

विषय की जानकारी के लिए एक वीडियो लिक है . ( हिंदी अंग्रजी मिश्रित  )

https://www.youtube.com/watch?v=7EjIEPHrJ9c

अशोक उपाध्याय

 

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